यूपी के 762 में से 559 नगर निकाय अब विकास प्राधिकरणों की तर्ज पर करेंगे काम, योगी कैबिनेट ने दी मंजूरी
- जिन नगर निकायों में विकास प्राधिकरण नहीं, वहां भी लागू होंगे भवन निर्माण और मानचित्र संबंधी नियम
- प्रदेश के 762 नगर निकायों में से 559 को मिलेगा विकास प्राधिकरण और आवास विकास की नियमावलियों के मानदंड लागू करने का अधिकार
- नगर पालिका अधिनियम 1916 में संशोधन को मंत्रिपरिषद की स्वीकृति, शहरी विकास व्यवस्था में आएगी एकरूपता
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में शहरी विकास और भवन निर्माण से जुड़ी व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश के 559 नगर निकायों को विकास प्राधिकरणों और आवास विकास की नियमावलियों के मानदंड लागू करने का अधिकार देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत जिन नगर निकायों में विकास प्राधिकरण नहीं हैं, वहां भी भवन निर्माण और मानचित्र से जुड़े मामलों में निर्धारित मानकों को लागू किया जा सकेगा। इस फैसले के लिए नगर पालिका अधिनियम 1916 में आवश्यक संशोधनों को भी मंत्रिपरिषद ने स्वीकृति दे दी है।
559 नगर निकायों को मिलेंगे नए अधिकार
शुक्रवार को लखनऊ स्थित लोक भवन में कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में कुल 762 नगर निकाय हैं। इनमें से 559 ऐसे नगर निकाय हैं, जहां विकास प्राधिकरण नहीं हैं।
अब इन नगर निकायों को भी विकास प्राधिकरण और आवास विकास की नियमावलियों में निर्धारित मानदंडों को लागू करने का अधिकार दिया जाएगा। इससे भवन निर्माण और मानचित्र संबंधी व्यवस्थाओं में एकरूपता लाने में मदद मिलेगी।
भवन निर्माण के मानचित्र और मानकों में आएगी एकरूपता
नगर विकास मंत्री ने बताया कि वर्तमान में जिन क्षेत्रों में विकास प्राधिकरण हैं, वहां भवन निर्माण के मानचित्र और विकास संबंधी योजनाएं प्राधिकरण की निर्धारित नियमावलियों के अनुसार तैयार की जाती हैं। वहीं, विकास प्राधिकरण विहीन नगर निकायों में व्यवस्था अलग होने के कारण मानकों में भिन्नता रहती है।
नई व्यवस्था के तहत ऐसे नगर निकाय भी विकास प्राधिकरणों और आवास विकास की नियमावलियों के मानदंड लागू कर सकेंगे। इससे भवन निर्माण से जुड़े नियमों में समानता लाने और शहरी विकास को व्यवस्थित करने का रास्ता साफ होगा।
नगर पालिका अधिनियम 1916 में होगा संशोधन
मंत्री एके शर्मा ने बताया कि इस व्यवस्था को लागू करने के लिए नगर पालिका अधिनियम 1916 के कई प्रावधानों में संशोधन की आवश्यकता है। मंत्रिपरिषद ने इन संशोधनों को स्वीकृति दे दी है।
उन्होंने कहा कि इस निर्णय के बाद 559 नगर निकाय विकास प्राधिकरणों की तर्ज पर काम कर सकेंगे। हालांकि, इसका अर्थ इन नगर निकायों को अलग विकास प्राधिकरण घोषित करना नहीं है, बल्कि उन्हें संबंधित नियमावलियों के मानदंड लागू करने का अधिकार देना है।
छोटे और मध्यम शहरों में भी व्यवस्थित विकास का रास्ता
सरकार के इस निर्णय का असर उन छोटे और मध्यम शहरों पर पड़ने की उम्मीद है, जहां अभी विकास प्राधिकरण नहीं हैं। इन क्षेत्रों में भवन निर्माण के मानकों, मानचित्र संबंधी प्रक्रियाओं और नियोजित शहरी विकास की व्यवस्था को अधिक एकरूप बनाया जा सकेगा।
हालांकि, नए अधिकारों के प्रयोग की प्रक्रिया और संबंधित नियमों के लागू होने की विस्तृत स्थिति अधिनियम में संशोधन तथा उसके बाद जारी होने वाले शासनादेशों से स्पष्ट होगी।

