हमारी आबादी का एक प्रतिशत आज भी अंधता का शिकार : प्रो. सूरज सेंजम

WhatsApp Channel Join Now
हमारी आबादी का एक प्रतिशत आज भी अंधता का शिकार : प्रो. सूरज सेंजम


मुरादाबाद, 15 मार्च (हि.स.)। सीएल गुप्ता नेत्र संस्थान मुरादाबाद में रविवार को 9वीं नेशनल लो विजन कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। कांफ्रेंस में मुख्य अतिथि आरपी सेंटर एम्स, नई दिल्ली से प्रोफेसर सूरज सेंजम ने बताया कि वर्तमान समय में हमारी आबादी का एक प्रतिशत आज भी आंशिक एवं पूर्णतया अंधता का शिकार हैं, जो हमारे समाज और देश पर एक बड़ी जिम्मेदारी की तरह है।

प्रोफेसर सूरज सेंजम ने आगे कहा कि इसके निराकरण हेतु न केवल बड़ी संस्थाओं द्वारा लगातार एडवांस उपकरण आदि के माध्यम से लो विजन से लड़ने की क्षमता को विकसित किया जा रहा है बल्कि काउंसलिंग और रिहैबिलिटेशन के माध्यम से ऐसे व्यक्तियों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किया जा रहा है। उन्हाेंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से कुछ ऐसे उपकरण मौजूद हैं जिनके इस्तेमाल से लो विजन के मरीज को देखने में बहुत ही सुविधा होती है, जिसे वह अपने रोजमर्रा के सभी कार्य आसानी से कर पाते हैं।

नेशनल कॉन्फ्रेंस में यूपीयूएमएस सैफई से आए डॉ आदित्य त्रिपाठी ने बताया कि लो विजन के मरीजों का रेफरेक्शन एवं असेसमेंट किस प्रकार करना चाहिए, इसमें उपयोग होने वाले सभी चरणों के बारे में रूबरू कराया। असिस्टेंट प्रोफेसर एमिटी यूनिवर्सिटी सुगंधा ने बताया कि अंधता एक ग्लोबल समस्या बनकर सबके सामने आ रहा है और भारत में बहुत तेजी से बढ़ रहा है।

सीएल गुप्ता नेत्र संस्थान के ऑप्टोमेट्री हेड फनी कृष्ण ने लो विजन डिपार्मेंट का परिचय देते हुए सभी को बताया कि हमारे संस्थान में नेत्र परीक्षण के उपरांत लो विजन या पूर्णतया अंधता वाले मरीजों की अलग से जांच की जाती है एवं जरूरत पड़ने पर उन्हें विभिन्न प्रकार की सहायक सेवाओं के माध्यम से सहयोग किया जाता है और अंत में रिहैबिलिटेशन के लिए रेफर किया जाता है।

हिमांशु सिंह द्वारा लो विजन के मरीजों को किस प्रकार देखा जाता है एवं उनकी कौन-कौन सी जांच एवं कौन से मुख्य बिंदुओं पर ध्यान देने की आवश्यकता होती है, इस पर चर्चा की। संस्था की स्पेशल एजुकेटर आसमा ने अपनी प्रेजेंटेशन के माध्यम से सभी को बताया कि काउंसलिंग इस प्रक्रिया का एक विशेष अंग है, काउंसलिंग न केवल मरीज की बल्कि उसके परिवार की भी होनी आवश्यक है।

संस्था के लो विजन एक्सपर्ट सुनील चौहान के द्वारा लो विजन डिपार्टमेंट के साथ जुड़ी अन्य सपोर्ट सर्विसेज के बारे में जानकारी दी और कार्यक्रम के अंतिम चरण में कौशिकी एवं कातीया ने लो विजन के उपकरणों के इस्तेमाल का डेमोंसट्रेशन दिया। संस्था की चेयरपर्सन डॉ आशी खुराना ने बताया कि हमारे संस्थान में लगभग 2000 मरीजों का इलाज चल रहा है और उनमें से कई मरीजों को रिहैबिलिटेशन से जोड़ा गया है।

संस्था की ट्रस्टी शिखा गुप्ता ने कहा कि इस कांफ्रेंस का उद्देश्य हर वर्ष यही रहता है कि पैरामेडिकल सेवाओं में पढ़ाई कर रहे छात्र-छात्राओं को समाज की इस बढ़ती हुई आवश्यकता की ओर ध्यान केंद्रित कराया जाए तथा उन्हें नई तकनीक से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण दिया जाए। हर वर्ष संस्थान में ऐसे करीबन 100 छात्र-छात्राओं को इस कांफ्रेंस के माध्यम से जागरुक एवं प्रशिक्षित किया जाता है।

कार्यक्रम का संचालन ऑप्टोमेट्रिस्ट आफरीन ने किया व संयोजन प्रशासनिक अधिकारी गरिमा सिंह ने किया। सहायक सेवाओं में अतुल वीज, शर्मेंद्र बिश्नोई, बिलाल सिद्दीकी, अनिल सपरा, सुरेश, सुनील, मुन्ना सिंह, सूरज चौरसिया, राजकुमार सिंह, तस्लीम आदि का विशेष सहयोग रहा।

हिन्दुस्थान समाचार / निमित कुमार जायसवाल

Share this story