सीपरी बाजार के 120 से अधिक सब्जी विक्रेताओं पर विस्थापन का संकट, वैकल्पिक व्यवस्था की मांग तेज

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सीपरी बाजार के 120 से अधिक सब्जी विक्रेताओं पर विस्थापन का संकट, वैकल्पिक व्यवस्था की मांग तेज


झांसी, 10 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के झांसी में सीपरी बाजार क्षेत्र में नगर निगम की प्रस्तावित नई मार्केट निर्माण योजना के चलते 120 से अधिक फुटकर सब्जी विक्रेताओं के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। वर्षों से कारोबार कर रहे विक्रेताओं ने बिना वैकल्पिक व्यवस्था के हटाए जाने का विरोध जताते हुए पुनर्वास की मांग उठाई। इस दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य भी उनके समर्थन में नगर निगम पहुंचे और अधिकारियों से वार्ता की।

नगर निगम द्वारा सीपरी बाजार में नई मंडी एवं आधुनिक मार्केट निर्माण की योजना बनाई गई है। निर्माण कार्य शुरू होने से पहले क्षेत्र में कारोबार करने वाले सब्जी विक्रेताओं को आशंका है कि उन्हें मौजूदा स्थान से हटा दिया जाएगा। उनका कहना है कि अब तक नगर निगम ने उनके पुनर्वास या व्यापार के लिए किसी वैकल्पिक स्थान की घोषणा नहीं की है। ऐसे में यदि उन्हें हटाया गया तो सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ेगा।

अपनी मांगों को लेकर सब्जी विक्रेता नगर निगम पहुंचे, जहां पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने उनका समर्थन किया। उन्होंने अपर नगर आयुक्त से मुलाकात कर मांग की कि जब तक सभी प्रभावित विक्रेताओं के लिए स्थायी एवं उपयुक्त वैकल्पिक स्थान उपलब्ध नहीं कराया जाता, तब तक निर्माण कार्य और हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।

प्रदीप जैन आदित्य ने कहा कि शहर का विकास आवश्यक है, लेकिन विकास योजनाओं के कारण गरीब और छोटे व्यापारियों की आजीविका प्रभावित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नगर निगम को पहले पुनर्वास की स्पष्ट योजना बनानी चाहिए और उसके बाद ही निर्माण कार्य शुरू करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के विक्रेताओं को हटाने का प्रयास किया गया तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया जाएगा।

सब्जी विक्रेताओं की पीड़ा

सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि वे कई वर्षों से इसी स्थान पर कारोबार कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। यदि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें हटाया गया तो उनके सामने आर्थिक संकट और भूखमरी जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। उनका कहना है कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन पहले उन्हें स्थायी एवं उचित स्थान उपलब्ध कराया जाए, उसके बाद ही निर्माण कार्य शुरू किया जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया

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