शास्त्रीय संगीत भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर : प्रदीप श्रीवास्तव

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शास्त्रीय संगीत भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर : प्रदीप श्रीवास्तव


--एनसीजेडसीसी के विमर्श में प्रयाग संगीत समिति के 100 वर्षों की गौरवगाथा पर हुई चर्चा

प्रयागराज, 02 मई (हि.स)। भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य एवं सांस्कृतिक परम्पराओं की अमूल्य धरोहर को पिछले सौ वर्षों से संजोए हुए प्रयाग संगीत समिति की गौरवशाली यात्रा पर शनिवार को प्रयाग संगीत समिति के रजिस्ट्रार प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि शास्त्रीय संगीत भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। प्रयाग संगीत समिति ने पिछले 100 वर्षों में भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य एवं ललित कलाओं के संरक्षण और संवर्धन में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।

उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित “विमर्श” श्रृंखला के अंतर्गत संवाद कार्यक्रम में उन्होंने बतौर मुख्य वक्ता प्रदीप ने प्रयाग संगीत समिति की स्थापना से लेकर उसके शताब्दी वर्ष तक की प्रेरणादायी यात्रा, भारतीय संगीत एवं कला शिक्षा के क्षेत्र में संस्था के योगदान तथा भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि प्रयाग संगीत समिति की स्थापना 1926 में भारतीय संगीत और सांस्कृतिक परम्पराओं को संगठित एवं व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी। आज भी समिति उसी मूल भावना के साथ कार्य करते हुए देश-विदेश में भारतीय कला संस्कृति का प्रचार-प्रसार कर रही है। समिति से शिक्षा प्राप्त करने वाले हजारों विद्यार्थी आज विश्वभर में भारतीय संगीत की परम्परा को आगे बढ़ा रहे हैं।

प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि आज के समय में तकनीक संगीत शिक्षा का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है। समिति डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑडियो-वीडियो सामग्री और आधुनिक शिक्षण तकनीकों के माध्यम से विद्यार्थियों को शास्त्रीय संगीत से जोड़ रही है, ताकि नई पीढ़ी पारम्परिक कला को आधुनिक संसाधनों के साथ सहज रूप से सीख और समझ सके। संवाद के दौरान प्रयाग संगीत समिति के संस्थापक सदस्यों, प्रतिष्ठित गुरुओं और कलाकारों के योगदान के साथ-साथ बदलते समय में अपनाए गए नवाचारों पर भी चर्चा हुई।

इसके पूर्व कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य वक्ता के कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय, कार्यक्रम प्रभारी कृष्ण मोहन द्विवेदी एवं सहायक कार्यक्रम अधिशाषी मधुकांक मिश्रा ने दीप जलाकर किया। मुख्य वक्ता ने युवाओं को संगीत और कला से जोड़ने के लिए डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग तथा समिति द्वारा संचालित विशेष पहलों की जानकारी भी साझा की। कार्यक्रम का संचालन राजकुमार ने किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र

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