सीमैप में दस राज्यों के किसान ले रहे सगंधीय पौधों के वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण

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सीमैप में दस राज्यों के किसान ले रहे सगंधीय पौधों के वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण


लखनऊ, 09 जुलाई (हि.स.)। केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप) में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इस कार्यक्रम में देश के 10 राज्यों से 31 किसान भाग ले रहे हैं।

​पूर्व कार्यकारी निदेशक व पूर्व मुख्य वैज्ञानिक डा.आलोक कालरा ने कहा कि सीएसआईआर-सीमैप लगभग 62 वर्ष से औषधीय एवं सगंध पौधों मे अनुसंधान एवं विकास कार्य कर रहा है, जिसके अंतर्गत नई-नई प्रजातियों का विकास किया गया है, जिनसे अधिक पैदावार मिलती है। विश्व स्तरीय मांग को देखते हुए इनकी खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

उन्होंने आगे बताया कि औषधीय एवं सगंध पौधों का विश्व व्यापार 62 बिलियन है और यह बढ़कर वर्ष 2050 तक 50 ट्रिलियन होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि औषधीय एवं सगंध पौधों की खेती को अनउपजाऊ भूमियों मे सफलतापूर्वक की जा सकती है। इन फसलों को परम्परागत फसल चक्र में समाहित कर किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से यह भी निवेदन किया कि इन फसलों की खेती के साथ-साथ वैल्यू-एडिशन में भी काम करें। उन्होंने यह भी बताया कि औषधीय एवं सगंध पौधों के व्यापार में आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं, सीएसआईआर-सीमैप द्वारा विकसित तकनीकों पर आधारित हर्बल उत्पादों को सीएसआईआर-सीमैप, लखनऊ में स्थित इंक्यूबेसन फेसीलिटी से निर्माण कर बाजार में बिक्री कर सकते हैं।

​डॉ. आर. के. श्रीवास्तव, प्रमुख, व्यापार विकास ने प्रतिभागियों का स्वागत किया एवं तीन दिवसीय प्रशिक्षण के मध्य होने वाली गतिविधियों तथा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण/उद्यमिता विकास के बारें मे प्रतिभागियों को जानकारी दी। मंगलवार को प्रशिक्षण कार्यक्रम में राम प्रवेश यादव, वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी, मनोज कुमार, तकनीकी अधिकारी ने प्रतिभागियों को प्रक्षेत्र का भ्रमण कराया व पौधों की पहचान कराई। डॉ. संजय कुमार ने नीबूघास व रोशाघास के उत्पादन की उन्नत कृषि तकनीकी प्रतिभागियों से साझा की। डॉ. राजेश वर्मा ने जिरेनियम तथा खस की वैज्ञानिक खेती के बारें में प्रतिभागियों को जानकारी दी।

हिन्दुस्थान समाचार / उपेन्द्र नाथ राय / राजेश

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