सबको अपना मानकर चलना ही सहकारिता: मनोजकांत

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सबको अपना मानकर चलना ही सहकारिता: मनोजकांत


लखनऊ, 07 सितंबर (हि.स.)। सहकार भारती का दो दिवसीय अभ्यास वर्ग एस.आर. इंस्टीट्यूट में सोमवार को सम्पन्न हुआ। समापन सत्र के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सह क्षेत्र प्रचार प्रमुख व राष्ट्रधर्म के निदेशक मनोजकांत ने कहा कि ‘‘सबको एक साथ रखना, रहना, साथ कार्य करना, सबको अपना मानकर चलना ही सहकारिता होती है। पूंजी के न्याय संगत वितरण की समस्या का समाधान नहीं मिला, लेकिन सहकारिता ही पूंजी वितरण की समस्या का समाधान हो सकती है।’’

मनोजकांत ने कहा कि ‘‘बेरोजगारी की समस्या आज के समय की नहीं है बल्कि यह समस्या बहुत पहले भी रही है। पहले हमारे इतिहासों में, शास्त्रों में बेरोजगार शब्द नहीं हुआ करता था। आधुनिकीकरण से हमारे शब्द और व्यवहार भी बदले हैं। पाश्चात्य संस्कृति, भाषा, व्यवहार को अपनाने समाज को खराब कर लिया है। इसीलिए आज हम सभी के लिए सहकारिता और भी महत्वपूर्ण हो गया है। सहकारिता है तो समाज में हमारी प्राचीन संस्कृति, अनुशासन, भारतीयता के भाव बने रहेंगे। सहकारिता से ही नएं उद्यम लगाने की योजनाएं होंगी, उद्यम लगेंगे तो समाज का स्वावलम्बन होगा। भविष्य में सहकारिता का कोई विकल्प नहीं है, इससे जो भी जुड़ेगा अनुशासित होगा।

सहकार भारती के पैक्स प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय प्रमुख राजदत्त पाण्डेय ने सहकारिता इतिहास विषय पर अपने संबोधन में कह कि भारतीय संस्कृति में मानव जीवन के विकास में सहकारिता का पुराना संबंध है, मनुष्य एक सहकार प्राणी है। मानव जीवन बिना सामाजिक संबंधों का निर्वाह किये सुचारू रूप से जीवन व्यतीत नहीं कर सकता। व्यक्ति का सर्वांगीण विकास सामाजिक व्यवस्था के अनुरूप ही होता है और सहकारिता के माध्यम से सामाजिक व्यवस्था अपनाने से ही समास्याओं का समाधान कर सकता है।

सहकार भारती के प्रदेश महामंत्री अरविंद दुबे ने बताया कि आज अभ्यास वर्ग के तीन सत्र आयोजित किए गये हैं - जैसे सहकारिता का इतिहास, प्रकोष्ठ कार्य एवं सहकारी समितियों का गठन। विभाग संयोजक रामकुमार दीक्षित ने विभाग का संगठनात्मक वृत्त रखा।

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हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन

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