संस्कार भारती की चित्रकला कार्यशाला में बच्चे सीख रहे भारती कला परंपरा

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संस्कार भारती की चित्रकला कार्यशाला में बच्चे सीख रहे भारती कला परंपरा


फर्रुखाबाद,02 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में कला एवं साहित्य की संस्था संस्कार भारती की ग्रीष्मावकाश कला संस्कृति कार्यशाला में चित्रकला प्रशिक्षण के माध्यम से बच्चों को भारतीय कला की प्राचीन परंपराओं से जोड़ा जा रहा है। प्रशिक्षिका मोनिका गुप्ता के मार्गदर्शन में बच्चे रेखाओं, बिंदुओं और विभिन्न कलात्मक आकृतियों के जरिए प्रकृति चित्रण, वास्तुकला, मानवीय आकृति और आधुनिक कला का बोध कर रहे हैं।

प्रशिक्षिका मोनिका गुप्ता के अनुसार, “चित्रकला भारत की प्राचीन विद्या है। मानव सभ्यता के साथ इसका विकास मिला है। प्राचीन गुफाओं और कंदराओं में मानव सभ्यता के प्राचीन रेखा चित्र मिलते हैं। चित्रकला मानव मन के विचार, कल्पना और भावों की अभिव्यक्ति का माध्यम है।”

पिचवाई पेंटिंग से श्रीकृष्ण कला की जानकारी

कार्यशाला में पिचवाई पेंटिंग के माध्यम से बच्चों को भारतीय संस्कृति और श्रीकृष्ण से जुड़ी पारंपरिक कला की जानकारी दी जा रही है। स्केचिंग में रेखाओं, अनुपात और अवलोकन कौशल का महत्व समझाया गया। साथ ही भारतीय संसद, पारंपरिक कला के महत्व से भी बच्चों को परिचित कराया गया।

बच्चे स्वतंत्र रूप से स्केचिंग, पिचवाई पेंटिंग, पेंसिल चित्र और रंगों का संतुलित उपयोग करना सीख रहे हैं। मेहंदी कला में मांडला आर्ट की मूल तकनीकें भी सरलता के साथ सिखाई जा रही हैं, जिससे बच्चे आसानी से इसे अपना सकें।

कार्यशाला में बच्चों को यह भी बताया जा रहा है कि चित्रकला हमें सोच, सृजनात्मकता और समाज को नए दृष्टिकोण से देखने की प्रेरणा देती है। संस्कार भारती का प्रयास है कि बच्चे भारतीय कला को समझें और उसे आगे बढ़ाएं।

पाठशाला की व्यवस्था में संस्था के पदाधिकारी सुरेंद्र पांडेय, डॉ रविंदर यादव, डॉक्टर राकेश गंगवार, आदेश अवस्थी, गौरव मिश्रा बंटी, अरविंद दीक्षित, नरेंद्र नाथ मिश्रा, कुलभूषण श्रीवास्तव,दीपक रंजन सक्सेना, अनुभव सारस्वत अशोक शुक्ला आदि मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / Chandrapal Singh Sengar

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