मीरजापुर में ध्रुव से प्रहलाद तक गूंजी भक्ति की धारा, कथा में उमड़ा आस्था का सैलाब

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मीरजापुर में ध्रुव से प्रहलाद तक गूंजी भक्ति की धारा, कथा में उमड़ा आस्था का सैलाब


मीरजापुर, 20 अप्रैल (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद मीरजापुर के हलिया क्षेत्र के हथेड़ा गांव में चल रही संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन सोमवार को भक्ति और आध्यात्मिक संदेशों से सराबोर रहा। कथा व्यास पंडित विष्णु धर द्विवेदी ने ध्रुव चरित्र का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रोताओं को जीवन की गूढ़ शिक्षाएं दीं।

उन्होंने कहा कि संसार का प्रत्येक मनुष्य मानो राजा उत्तानपाद के समान है, जिसकी बुद्धि रूपी दो प्रवृत्तियां—सुनीति और सुरुचि—हमेशा उसे प्रभावित करती हैं। सुनीति का पुत्र ध्रुव आज भी अटल भक्ति का प्रतीक है, जबकि सुरुचि का पुत्र उत्तम नश्वरता को दर्शाता है। इस उदाहरण के माध्यम से उन्होंने समझाया कि मनुष्य को सदैव शुभ नीति का अनुसरण करना चाहिए, जिससे जीवन का कल्याण संभव हो सके।

कथा के दौरान पुरंजनोपाख्यान और जड़भरत की अद्भुत कथा सुनाते हुए उन्होंने बताया कि मनुष्य की अंतिम मति ही उसकी गति तय करती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जड़भरत ने हिरण के चिंतन के कारण हिरण योनि प्राप्त की, वहीं अजामिल जैसे पापी ने अंतिम समय में ‘नारायण’ नाम का उच्चारण कर मोक्ष प्राप्त कर लिया। इसके बाद भक्त प्रहलाद की कथा ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। व्यास जी ने बताया कि जब प्रहलाद के सामने उनके पिता हिरण्यकशिपु उन्हें मारने को तत्पर हुए, तब उन्होंने भगवान को पुकारा और भगवान नरसिंह रूप में प्रकट होकर अपने भक्त की रक्षा की। यह प्रसंग सुनकर पंडाल में भक्ति का वातावरण गूंज उठा। इस अवसर पर समाजसेवी विनोद सिंह, लक्ष्मी नारायण मिश्र एडवोकेट, शकुंतला देवी, सुधा तिवारी, आयुषी तिवारी, मानस तिवारी सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा श्रवण कर सभी भक्त भाव-विभोर हो उठे।

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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा

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