मकर संक्रांति पर भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट में उमड़ा आस्था का सैलाब

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मकर संक्रांति पर भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट में उमड़ा आस्था का सैलाब


-लाखों श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी व भरतकूप में स्नान कर किया भगवान कामतानाथ के दर्शन

चित्रकूट, 15 जनवरी (हि.स.)। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट में आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। तड़के से ही देव गंगा मंदाकिनी व पौराणिक भरतकूप में पुण्य स्नान के लिए लाखों श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। जय श्रीराम और हर-हर गंगे के जयकारों के बीच श्रद्धालु पवित्र जल में आस्था की डुबकी लगाकर दान-पुण्य कर रहे हैं। इसके बाद मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भगवान श्री कामतानाथ के दर्शन-पूजन के बाद पंचकोसी परिक्रमा लगाई।इसके साथ ही साधु-संतों का आर्शीवाद लिया।

मकर संक्रांति के साथ ही भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट के भरतकूप में पांच दिवसीय धार्मिक मेले की विधिवत शुरुआत हो गई है, जो अगले पांच दिनों तक पूरे शबाब पर रहेगा। कामतानाथ मंदिर के प्रधान पुजारी भरत शरण दास महाराज ने गुरुवार काे बताया कि इन दिनों प्रयागराज में माघ मेला चल रहा है और मकर संक्रांति का अमृत स्नान भी हो रहा है, लेकिन चित्रकूट की पौराणिक महिमा श्रद्धालुओं को अपनी ओर विशेष रूप से खींच रही है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार और दिल्ली तक से आए लाखों श्रद्धालु यह कहते नजर आए कि प्रयाग का अपना महत्व है, लेकिन मंदाकिनी देव गंगा व भरतकूप में स्नान करने का पुण्य अलग ही अनुभूति देता है। भरतकूप के साथ-साथ तपोभूमि के अन्य धार्मिक स्थलों पर भी मेले की रौनक देखते ही बन रही है। मंदाकिनी तट रामघाट, सूर्यकुंड आश्रम, त्रिवेणी (शबरी जल प्रपात के पास), परानू बाबा आश्रम, मंदाकिनी-यमुना संगम स्थल कनकोटा, सगवारा और साईपुर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी है।

घाटों पर स्नान के बाद लोग पूजा-अर्चना में लीन दिखे, तो वहीं मेला क्षेत्र में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के चेहरे खुशी से खिले नजर आए। मेले में आये श्रद्धालु अशाेक केशरवानी व ऋषि आर्या आदि ने कहा कि चित्रकूट विश्व का सबसे प्राचीन तीर्थ हैै। यहां देव गंगा मंदाकिनी व भरतकूप में स्नान के बाद कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा लगाने से श्रद्धालुओं की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

वहीं भरतकूप मेले में बच्चों के लिए लगे झूले, ड्रैगन और चरखी मेले का मुख्य आकर्षण बने हुए हैं। जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी सुधीर कुमार ने बताया कि मेले को लेकर बेहतर इंतजाम किये गये है। वहीं जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षा, सफाई और यातायात के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने फोर्स के साथ मेले में लगातार गश्त किया। ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसके अलावा भरतकूप मंदिर के महंत लवकुश दास ने बताया, मान्यता है कि भगवान श्री राम के राज्याभिषेक के लिए भरत जी देशभर के प्रमुख तीर्थों और पवित्र नदियों से जल लेकर चित्रकूट आए थे। जब श्रीराम ने वनवास से लौटकर राज्याभिषेक स्वीकार नहीं किया, तब भरत जी ने उस पवित्र जल को सुरक्षित रखते हुए भरतकूप में समाहित कर दिया। इसी कारण विश्वास है कि भरतकूप में स्नान करने से समस्त तीर्थों और नदियों में स्नान का पुण्य एक साथ प्राप्त होता है। यही कारण है कि मकर संक्रांति पर यहां स्नान का विशेष महत्व माना जाता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रतन पटेल

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