फर्रुखाबाद के वैभव सिंह राठौर को मिला राष्ट्रीय चेंजमेकर अवॉर्ड, नगर में हर्ष

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फर्रुखाबाद के वैभव सिंह राठौर को मिला राष्ट्रीय चेंजमेकर अवॉर्ड, नगर में हर्ष


फर्रुखाबाद,08 अक्तूबर( हि.स.)। फर्रुखाबाद के वैभव सिंह राठौर के सामाजिक कार्यों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने से नगर में प्रसन्नता का माहाैल हैं। लाेग उनकी इस उपलब्धि के लिए तहे दिल से बधाई दे रहे हैं। गुजरात के नर्मदा जिले में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी परिसर में आयोजित द्वितीय राष्ट्रीय चेंजमेकर मीट एवं चेंजमेकर अवॉर्ड्स 2026 में रिवैम्प इंडिया फाउंडेशन के संस्थापक एवं सीईओ वैभव को व्यक्तिगत चेंजमेकर श्रेणी में देश भर के 51 चेंजमेकरों में शामिल कर सम्मानित किया गया। इस राष्ट्रीय आयोजन में वैभव ने उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। चार दिवसीय यह आयोजन 1 से 4 अक्टूबर तक चला। वैभव को गुजरात सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री भूपेंद्रसिंह चुडासमा, जायडेक्स समूह के अध्यक्ष डॉ. अजय रांका और समन्वय प्रतिष्ठान के संयोजक डॉ. जिगर इनामदार ने सम्मान प्रदान किया।

28 राज्यों के प्रतिनिधि जुटे: वडोदरा की समन्वय प्रतिष्ठान ने इंडिया फाउंडेशन और द चेंजमेकर्स नेटवर्क के साथ मिलकर यह आयोजन किया। इसमें 28 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों से जमीनी स्तर पर काम करने वाले 51 प्रतिनिधि शामिल हुए। उद्घाटन सत्र में गुजरात विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी मौजूद रहे। आवासीय कार्यक्रम के पहले दिन प्रतिभागियों ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का भ्रमण किया, जबकि 4 अक्टूबर को समापन समारोह और अवॉर्ड संध्या में सम्मान प्रदान किए गए।

10,000 फलदार पेड़, हर पेड़ का एक छात्र रखवाला : रिवैम्प इंडिया फाउंडेशन उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण, शिक्षा, मासिक धर्म स्वास्थ्य, कौशल विकास और कचरा प्रबंधन पर काम कर रहा है। संस्था की फलदार परियोजना के तहत 120 से अधिक सरकारी विद्यालय परिसरों में करीब 10,000 फलदार पेड़ लगाए गए हैं। हर पेड़ की देखभाल की जिम्मेदारी छात्र खुद उठाते हैं। संस्था पेड़ों की गिनती से ज्यादा उनके जीवित रहने पर जोर देती है, और इसी का नतीजा है कि लगभग 75 प्रतिशत पेड़ आज भी जीवित हैं। मार्च 2026 में द बेटर इंडिया ने इस परियोजना पर विशेष रिपोर्ट प्रकाशित की थी।

किशोरियों की सेहत और सम्मान : उद्धति परियोजना और पीरियड डायरी के माध्यम से संस्था किशोरियों के बीच मासिक धर्म स्वास्थ्य, स्वच्छता और गरिमा पर काम कर रही है। अब तक 5,000 से अधिक किशोरियां इस पहल से जुड़ चुकी हैं।

स्कूल से छूटे बच्चों को फिर कक्षा तक : प्रतिज्ञा अभियान के तहत स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा औपचारिक शिक्षा से जोड़ा जा रहा है। बच्चों के स्कूल से बाहर होने के कारणों पर संस्था ने जमीनी अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट कानपुर नगर के जिलाधिकारी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को सौंपी है। सरकारी विद्यालयों के लिए कहानी आधारित शिक्षण कार्यक्रम खोज भी संस्था के कार्यों में शामिल है।

युवाओं को हुनर, माताओं को आजीविका : समर्थ परियोजना के जरिए वंचित युवाओं को कौशल और डिजिटल साक्षरता का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रगति कार्यक्रम के तहत सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की माताओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर आजीविका के अवसर तैयार किए जा रहे हैं। पहले चरण में ग्रामीण उत्तर प्रदेश के 10 सरकारी विद्यालय समुदायों की 500 महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य है। वहीं भक्षक परियोजना के तहत गांवों में मछली के आकार की संरचनाएं लगाकर समुदाय स्तर पर प्लास्टिक कचरा इकट्ठा किया जाता है।

170 स्वयंसेवकों की टीम : संस्था उत्तर प्रदेश में पंजीकृत धारा 8 कंपनी है और 80जी व 12एबी प्रमाणित है। इसकी टीम में 4 पूर्णकालिक कर्मचारी, 20 अंशकालिक प्रशिक्षक और 170 स्वयंसेवक काम कर रहे हैं।

सेवा, शोध और संकल्प : वैभव ने समाज कार्य में स्नातकोत्तर (एमएसडब्ल्यू) किया है और छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर से समाज कार्य में पीएचडी कर रहे हैं। वे ग्रामीण फर्रुखाबाद में सक्रिय फर्रुखाबाद युवा सेवा समिति के सह संस्थापक हैं और वैभव्स वर्डिक्ट नाम से पॉडकास्ट भी चलाते हैं। सेवा, शोध, संकल्प को अपना मूल मंत्र मानने वाले वैभव इससे पहले यस फेलोशिप, जागरण संस्कारशाला, जागरण गुरु मंत्र और फर्रुखाबाद पुनरुत्थान जैसे मंचों से जुड़ चुके हैं। सम्मान मिलने पर वैभव ने कहा कि यह सम्मान उन बच्चों, किशोरियों और ग्रामीणों का है जो हमारे हर अभियान की असली ताकत हैं। देशभर के चेंजमेकरों से मिलकर जो सीखा है, उसे उत्तर प्रदेश के गांवों तक ले जाएंगे।

हिन्दुस्थान समाचार / चंद्रपाल सिंह सेंगर

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