प्रयागराज में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को किया जागरूक

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प्रयागराज में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को किया जागरूक


प्रयागराज, 29 अप्रैल (हि.स)। किसानों को रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग, जैविक विकल्पों के महत्व तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के वैज्ञानिक उपायों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से बुधवार को आकांक्षी विकास खंड बहरिया में भा.कृ.अनु.प. के तत्वावधान में भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान वाराणसी ने राष्ट्रीय उर्वरक जागरूकता अभियान के अंतर्गत किसानों को जागरूक किया गया।

प्रयागराज के आकांक्षी विकास खंड बहरिया, ग्राम-फजिलाबाद उर्फ कालूपुर में बहरिया फार्मर प्रोड्यूसर कं. लि के कृषकों को ‘संतुलित उर्वरक उपयोग एवं जैविक खेती’ विषय पर जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया। मुख्य अतिथि बहरिया ब्लाक प्रमुख शशांक मिश्र ने उद्घाटन किया। ब्लॉक प्रमुख ने भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान वाराणसी से लाये गए 70-75 कृषकों को उर्वरक के किट बांटे और उन्होंने किसानों को रासायनिक उर्वरक के कम से कम प्रयोग और जैविक खेती के बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया।

इस दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों को जैविक खाद के उपयोग एवं उसके दीर्घकालिक लाभों के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में ब्लाक स्तर के अधिकारी सहायक विकास अधिकारी संजय यादव, सहायक विकास अधिकारी (कृषि) अनिल कुमार, मुख्यमंत्री शोधार्थी सीएम फेलो डॉ अर्चना, पशु पालन विभाग डॉ प्रियदर्शना एफपीओ मुख्य कार्यकारी अधिकारी शंकर लाल यादव व एस एम सहगल फाउंडेशन सुमित यादव भी ब्लाक परिसर बहरिया में उपस्थित रहे।

डॉ. अनंत बहादुर ने संतुलित उर्वरक प्रयोग करने की आवश्यकता और उसके विभिन्न विकल्पों पर प्रकाश डाला। इसके लिए हरी खाद, जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट इत्यादि तमाम जैविक आयामों के प्रयोग पर बल दिया। उन्होंने बताया कि यह पद्धति न केवल मृदा की उर्वरता को बनाए रखती है, बल्कि उत्पादन की गुणवत्ता भी बढ़ाती है। डॉ. सुजान मजूमदार किसानों को ट्राइकोडर्मा एवं सूक्ष्मजीव आधारित जैव उर्वरकों के उपयोग के विषय में जानकारी एवं प्रशिक्षण दिया तथा बताया कि ये तकनीकें फसलों को रोगों से बचाने और उत्पादन बढ़ाने में सहायक हैं।

इस अवसर पर संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक एवं विभागध्यक्ष डॉ. अनंत बहादुर, वरिष्ठ वैज्ञानिक, डॉ. प्रदीप करमाकर, हिरनम्य दास एवं वैज्ञानिक डॉ. सुजान मजूमदार उपस्थित रहे। साथ ही प्रयागराज कृषि विज्ञान केंद्र से डॉ. मुकेश मसीह, निमिषा नटराजन एवं आर. पी. सिंह ने भी कार्यक्रम में सहभागिता कर किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया।

प्रयागराज कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों ने किसानों को स्थानीय संसाधनों के उपयोग, रासायनिक उर्वरक के दुरुपयोग तथा तथा मिट्टी का नमूना मिट्टी के स्वास्थ्य की जांच के लिए कैसे लिया जाए, इस विषय पर जानकारी दी। अंत में किसान-वैज्ञानिक संवाद सत्र आयोजित किया गया, जिसमें किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र

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