प्रजापिता ब्रह्मा बाबा का मनाया गया 57वां स्मृति दिवस

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प्रजापिता ब्रह्मा बाबा का मनाया गया 57वां स्मृति दिवस


प्रयागराज, 18 जनवरी (हि.स.)। विश्वव्यापी संस्थान ब्रह्माकुमारीज के प्रयागराज क्षेत्र के मुख्यालय सद्भावना भवन, नैनी में रविवार को ब्रह्माकुमारीज के संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा बाबा का 57वां स्मृति दिवस, विश्व शांति दिवस के रूप में मनाया गया।

प्रयागराज की क्षेत्रीय संचालिका मनोरमा दीदी ने इस अवसर पर उपस्थित जनमानस को सम्बोधित करते हुए बताया कि 18 जनवरी 1969 को प्रजापिता ब्रह्मा बाबा ने संपूर्णता को प्राप्त कर अपना पुराना शरीर छोड़ा। उनका जन्म अविभाजित भारत के सिंध प्रांत के हैदराबाद शहर में दादा खूब चंद कृपलानी, जो एक अध्यापक थे, उनके घर में छोटे पुत्र के रूप में हुआ। बाल्यकाल से ही दिव्य गुणों एवं बुद्धि से परिलक्षित दादा लेखराज बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। बचपन में ही माता-पिता का साया सिर से उठ जाने के बावजूद, छोटी आयु में ही उन्होंने पहले अपने भाई के साथ और फिर खुद के व्यापार में हाथ आजमाया और भारत के प्रतिष्ठित स्वर्ण एवं हीरे की व्यापारियों में शामिल हो गए। पवित्र एवं निःस्वार्थ भाव से भक्ति, दान-पुण्य में संलग्न दादा लेखराज ने अपने जीवन में बहुत सम्पन्नता को प्राप्त किये।

उन्होंने आगे बताया कि 1936 में 60 साल की उम्र में निराकार परमपिता परमात्मा शिव ने उनको भावी विनाश एवं विश्व परिवर्तन का साक्षात्कार कराया एवं उनके तन का आधार लेकर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की स्थापना की। 1937 से 1950 तक कराची में तथा 1950 से 1969 तक भारत के माउंट आबू में रहकर उन्होंने विश्व सेवा के लिए परमात्मा शिव के दिए हुए गीता ज्ञान एवं सिखाए हुए राजयोग को आम जनमानस तक पहुंचाया। प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की दिव्य पालन एवं परमात्मा शिव पर उनके संपूर्ण निश्चय एवं समर्पण का अनुगमन करते हुए आज विश्व के पांचो महाद्वीपों में 15 लाख से ज्यादा भाई बहनें स्व-परिवर्तन से युग परिवर्तन के मंत्र को अपने जीवन का लक्ष्य बनाकर उनके बताए हुए मार्ग पर चल रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र

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