प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखना ही हमारे भविष्य की कुंजी : डॉ कृष्णा गुप्ता
-पृथ्वी और प्रकृति के प्रति निरंतर संवेदनशील रहें : नित्यानंद सिंह
-पृथ्वी दिवस पर पतंजलि ऋषिकुल विद्यालय में रचनात्मक एवं प्रेरणादायक गतिविधियों का आयोजन
प्रयागराज, 22 अप्रैल (हि.स.)। पृथ्वी दिवस के अवसर पर पतंजलि ऋषिकुल विद्यालय में विद्यार्थियों की ओर से बुधवार को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए अनेक प्रेरणादायक एवं रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया गया। विद्यालय परिसर में उत्साह, सृजनात्मकता और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।
विद्यालय की उपाध्यक्षा डॉ. कृष्णा गुप्ता ने कहा कि पृथ्वी दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखना ही हमारे उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे पुनः उपयोग, संरक्षण और स्वच्छता जैसे मूल्यों को अपने दैनिक जीवन में अपनाएं।
विद्यालय की निदेशिका रेखा बैद एवं सचिव यशोवर्धन ने कहा कि पृथ्वी हमारा एकमात्र घर है, जिसकी सुरक्षा और संरक्षण हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि वे अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे प्रयासों जैसे जल संरक्षण, वृक्षारोपण और पुनर्चक्रण को अपनाकर पृथ्वी को सुरक्षित और हरित बनाने में योगदान दें।
विद्यालय के प्रधानाचार्य नित्यानंद सिंह ने कहा कि पृथ्वी दिवस केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि पृथ्वी और प्रकृति के प्रति निरंतर संवेदनशील बने रहने का प्रेरणास्रोत है। आज किए गए हमारे छोटे-छोटे प्रयास ही भविष्य में बड़े और सकारात्मक परिवर्तन का आधार बनते हैं। अतः प्रत्येक विद्यार्थी का यह कर्तव्य है कि वह पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझे और उसे अपने व्यवहार में उतारें।
“हमारी शक्ति, हमारा ग्रह” थीम के अंतर्गत कक्षा 1 के बच्चों ने रंग-बिरंगे स्टिकर्स पर “पृथ्वी बचाओ, बिजली बचाओ, जल बचाओ” जैसे संदेश लिखकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। वहीं कक्षा 2 के विद्यार्थियों ने आकर्षक “रॉकिंग अर्थ” (झूमती हुई पृथ्वी) मॉडल तैयार किए, जो उनकी कल्पनाशक्ति और प्रकृति के प्रति प्रेम को दर्शा रहे थे। कक्षा 3, 4 एवं 5 के विद्यार्थियों ने “इको-लिगेसी फेस्टः हमारी पृथ्वी, हमारा संकल्प” विषय को अपनाया। वे “प्रकृति के रंग” (आसमानी नीले और हरे रंग) के वस्त्रों में सुसज्जित होकर आए और “क्रियात्मक कला” पहल में सक्रिय रूप से सहभागिता की। इसके अतिरिक्त उच्च कक्षाओं में भी विविध रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया गया।
कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों द्वारा “आज पुनः उपयोग, कल हरित भविष्य” विषय पर विविध रचनात्मक गतिविधियां की गईं। जिनमें विद्यार्थियों ने कंकड़ों पर पर्यावरण संदेशों के साथ चित्रकारी, प्रयुक्त बोतल के ढक्कनों से आकर्षक चाबी के छल्ले बनाना, पुरानी सीडी से चमकदार सजावटी वस्तुएं तैयार करना, प्लास्टिक एवं थर्माकोल की अनुपयोगी प्लेटों को नवीन रूप देना आदि संदेशों के साथ पर्यावरण अनुकूल थैले बनाना शामिल रहा। कक्षा 10 से 12 के विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण पर रचनात्मक कविता लेखन एवं व्यक्तिगत संकल्प प्रस्तुत कर अपनी जागरूकता और जिम्मेदारी का परिचय दिया। विद्यालय में वृक्षारोपण एवं स्वच्छता अभियान भी किए गए, जिसमें छात्रों एवं शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र

