नारायणी के तट पर गूंजा विज्ञान का रोमांच, कुशीनगर में राष्ट्रीय रॉकेट्री प्रतियोगिता शुरू

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नारायणी के तट पर गूंजा विज्ञान का रोमांच, कुशीनगर में राष्ट्रीय रॉकेट्री प्रतियोगिता शुरू


कुशीनगर, 01 नवंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के नारायणी नदी के तट पर पिपराघाट में रविवार को राष्ट्रीय स्तर की रॉकेट्री प्रतियोगिता का आगाज हुआ। इन-स्पेस मॉडल रॉकेट्री और कैनसैट इंडिया स्टूडेंट कंपटीशन-2026 के पहले दिन विभिन्न टीमों ने 20 कैनसैट लॉन्च किए। वहीं, मॉडल रॉकेट्री श्रेणी में अहमदाबाद की निरमा यूनिवर्सिटी ने पहला मॉडल रॉकेट प्रक्षेपित किया। तीन नवंबर तक चलने वाली इस प्रतियोगिता में देश के 17 राज्यों की 76 चयनित टीमें हिस्सा ले रही हैं।

इन-स्पेस, इसरो और एसएसडीएफ का संयुक्त आयोजन

भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) ने इसरो और श्रीनारायणी साइंस डेवलपमेंट फाउंडेशन (एसएसडीएफ) के सहयोग से प्रतियोगिता आयोजित की है। उद्घाटन समारोह में देवरिया के सांसद शशांक मणि त्रिपाठी, इन-स्पेस के अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार गोयनका, निदेशक (प्रमोशन) डॉ. विनोद कुमार, इसरो के पूर्व एसोसिएट रॉय एम. चेरियन, कैनसैट मूल्यांकन समिति के प्रमुख डॉ. सुरेंद्र पाल और एसएसडीएफ के निदेशक मनीष बजाज समेत विभिन्न संस्थानों के शिक्षक, मार्गदर्शक और प्रतिभागी मौजूद रहे।

पांच साल में 450 से अधिक हुए स्पेस स्टार्टअप

इन-स्पेस के अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार गोयनका ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में देश के अंतरिक्ष क्षेत्र में तेजी से बदलाव आया है। वर्ष 2019 में देश में केवल 14 स्पेस स्टार्टअप थे, जबकि अब इनकी संख्या बढ़कर 450 से अधिक हो गई है। इससे युवाओं के लिए अंतरिक्ष तकनीक, प्रक्षेपण प्रणाली, उपग्रह आधारित अनुप्रयोग और उद्यमिता के क्षेत्र में नए अवसर खुले हैं। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता में विद्यार्थियों का उत्साह और आत्मविश्वास उनकी तैयारी को दर्शाता है। ऐसे आयोजनों से उन्हें किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर व्यावहारिक अनुभव हासिल करने का मौका मिलता है।

छोटे शहरों तक पहुंचे अंतरिक्ष तकनीक का लाभ

सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने कहा कि अंतरिक्ष तकनीक का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे छोटे शहरों और टियर-2 व टियर-3 क्षेत्रों तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि रॉकेट या कैनसैट के प्रयोग में असफलता मिलने पर निराश होने के बजाय उससे सीखकर आगे बढ़ें। धैर्य, टीमवर्क और निरंतर प्रयास ही भविष्य के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की पहचान बनेंगे। कुशीनगर और देवरिया जैसे जिलों में राष्ट्रीय स्तर की वैज्ञानिक गतिविधियां स्थानीय युवाओं को नई संभावनाओं से जोड़ेंगी।

एक दिसंबर से शुरू होगा अगले संस्करण का पंजीकरण

इन-स्पेस के निदेशक (प्रमोशन) डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि मॉडल रॉकेट्री प्रतियोगिता के तीसरे संस्करण और कैनसैट इंडिया प्रतियोगिता के चौथे संस्करण के लिए पंजीकरण एक दिसंबर 2026 से शुरू होगा। दोनों प्रतियोगिताओं में कुल 10 ट्रॉफियां प्रदान की जाएंगी। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों को करियर के अवसरों से जोड़ने के लिए आयोजन के साथ रोजगार मेले का भी आयोजन किया गया है, जिसमें चार स्पेस कंपनियां हिस्सा ले रही हैं। उन्होंने इन-स्पेस, इसरो, एनएएल, थ्रस्टेक इंडिया, एसएसडीएफ और बरगद अमृत संगठन समेत आयोजन में सहयोग देने वाली संस्थाओं और निर्णायक मंडल के सदस्यों का आभार जताया।

विद्यार्थियों को मिलेगा इंजीनियरिंग का व्यावहारिक अनुभव

डॉ. विनोद कुमार ने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर वास्तविक इंजीनियरिंग चुनौतियों पर काम करने का अवसर देती हैं। इससे उनमें तकनीकी क्षमता, समस्या समाधान और टीम के साथ काम करने का कौशल विकसित होता है।

हिन्दुस्थान समाचार / दीपक

Livevns.news Desk
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