चिंता व तनाव से बढ़ रहा मनोदैहिक रोग : डॉ. जीएस तोमर
एमजीयूजी के आयुर्वेद कॉलेज में विश्व आयुर्वेद मिशन के संस्थापक अध्यक्ष का व्याख्यान
गोरखपुर, 25 मई (हि.स.)। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) के गुरु गोरक्षनाथ इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आयुर्वेद कॉलेज) में सोमवार को वाजीकरण चिकित्सा पर एक विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता विश्व आयुर्वेद मिशन के संस्थापक अध्यक्ष एवं आरोग्य भारती के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. जीएस तोमर ने कहा कि आज का मानव चिंता एवं तनाव से इतना ग्रसित है कि वह चाहे अनचाहे अनेक मनोदैहिक रोगों का शिकार होता जा रहा है।
डॉ. तोमर ने कहा कि हजारों वर्ष पहले आयुर्वेद में स्वस्थ एवं संस्कारवान संतति के लिए वाजीकरण का वर्णन किया गया है। यह वर्तमान परिदृश्य में सेक्सुअल हेल्थ के लिए आज भी उतना ही उपयोगी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं में यौन क्षमता में कमी आने की प्रवृति देखी जा रही है। इसके लिए आयुर्वेद में कैवाच (कोंच) जैसी अत्यंत प्रभावी औषधि बताई गई है जो यौन इच्छा की कमी को दूर करती है। यह औषधि शुक्रजनन होने से शुक्र की मात्रा को भी बढ़ाती है। इसके अलावा आयुर्वेद में अश्वगंधा, शतावर, विदारीकंद, वाराहीकंद, जायफल, लौंग, सालमपंजा एवं शिलाजीत अनेक प्रभावकारी औषधियांउपलब्ध हैं।
डॉ. तोमर ने युवाओं को मद्य, तम्बाकू एवं गुटका जैसे हानिकारक द्रव्यों से दूर रहने की सलाह देते हुए कहा कि इनके सेवन से न केवल यौन क्षमता में कमी आती है अपितु शरीर के लिवर, किडनी तथा फेफड़े आदि अति महत्वपूर्ण अंग भी क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद में वाजीकरण का उद्देश्य संस्कारवान एवं स्वस्थ संतति पैदा करना रहा है। व्याख्यान कार्यक्रम में डॉ. प्रज्ञा सिंह, डॉ. दिनेश कुमार सिंह, डॉ. प्रीति पाण्डेय आदि की सक्रिय सहभागिता रही
डायबिटीज एवं फैटी लिवर के रोगियों की बढ़ती संख्या चिंताजनक
गोरखपुर। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) के महंत दिग्विजय नाथ आयुर्वेद चिकित्सालय की विशिष्ट ओपीडी में विश्व आयुर्वेद मिशन के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. जीएस तोमर ने गठिया, दमा, डायबिटीज, लिवर, हृदयरोग, त्वचा रोग आदि के सौ से अधिक रोगियों का परीक्षण कर चिकित्सा परामर्श प्रदान किया। डॉ. तोमर ने बताया कि आजकल युवाओं के खानपान की विकृति के कारण डायबिटीज एवं फैटी लिवर के रोगियों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। इसके लिए इन्हें फास्ट फूड से हटकर अपनी पारंपरिक खाद्य पद्धति अपनानी होगी। इन रोगियों को आयुर्वेद मधुमेह नाशक औषधियों के साथ साथ आहार नियंत्रण, नियमित व्यायाम एवं विश्रांतिकर योगाभ्यास करना आवश्यक है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय

