उप्र राजकीय अभिलेखाकार लखनऊ में अभिलेखों के संरक्षण के लिए चल रही पाण्डुलिपि कार्यशाला
लखनऊ, 20 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सांस्कृतिक धरोहरों के प्रति संवेदनशील नीति के अनुरुप संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के अभिलेखों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्धता के क्रम में प्रदेश राजकीय अभिलेखागार लखनऊ में 19 से 23 जनवरी तक पांच दिवसीय अभिलेख/पाण्डुलिपि अभिरुचि कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। दूसरे दिन मंगलवार को कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि डाॅ. राजमणि, सेवानिवृत्त सहायक निदेशक अभिलेख, राष्ट्रीय अभिलेखागार नई दिल्ली तथा विशिष्ट अतिथि डाॅ. अमलेश कुमार मिश्र, निदेशक, हिस्ट्री डिवीजन रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार ने किया।
मुख्य अतिथि डाॅ. राजमणि ने शोधार्थियों को इतिहास में शोध के नवीन आयाम एवं वर्तमान परिदृश्य विषय पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने अपने वक्तव्य में शोध के लिए प्राथमिक, द्वितीय एवं तृतीय स्राेतों का उपयोग करते हुए शोध ग्रंथ तैयार करने के लिए शोधार्थियों को जानकारियां दीं। हमें सोशल मीडिया इन्टरनेट से प्राप्त जानकारी की सत्यता परखने के बाद ही उसका उपयोग करना चाहिए। उन्होंने बताया कि आर्काइव्स में सरकारी क्षेत्र के साथ-साथ निजी क्षेत्र में भी रोजगार की संभावनाएं हैं। आज देश के सभी राज्यों में अभिलेखागार हैं । साथ ही साथ निजी क्षेत्र भी अपने आर्काइव्स खोलने में पीछे नहीं हैं। जैसे गोदरेज, टाटा, सीईपीटी, विभिन्न बैंक, विश्वविद्यालय आदि।
निदेशक अभिलेखागार अमित कुमार अग्निहोत्री ने अपने उद्बोधन में बताया कि यह कार्यशाला का द्वितीय चरण है। प्रथम चरण माह जून, 2025 में किया गया था। इस कार्यशाला में 700 से अधिक अभ्यर्थियों ने आनलाइन रजिस्ट्रेशन किया। उनमें से 200 अभ्यर्थियों को चयनित किया गया। उन्होंने बताया कि ज्ञान भारतम् मिशन के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश के 75 जनपदों में पाण्डुलिपियों के लिए भारत सरकार द्वारा सर्वे कराया जाना है तथा प्राप्त पाण्डुलिपियों का डिजिटाइजेशन के बाद पोर्टल पर अपलोड कर दिया जायेगा तथा आवश्यकतानुसार उनका संरक्षण भी किया जायेगा।
इस कार्यशाला में प्रतिभागियों द्वारा वक्ताओं से अनेक प्रश्न भी पूछे गये। विद्यार्थियों को वक्ताओं द्वारा समुचित उत्तर प्रदान किया गया, जो कि विद्यार्थियों के लिए अत्यन्त उपयोगी रहा।
हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा

