संकट मोचन संगीत समारोह : छलकीं पंडित राजन मिश्र की स्मृतियां, पिछले वर्ष की यादगार रिकॉर्डिंग का हुआ प्रसारण

संकट मोचन संगीत समारोह : छलकी पंडित राजन मिश्र की स्मृतियां, पिछले वर्ष की यादगार रिकॉर्डिंग का हुआ प्रसारण

वाराणसी। ऑनलाइन संकट मोचन संगीत समारोह की तीसरी निशा पर सोमवार को पद्मभूषण पंडित राजन मिश्र को श्रद्धांजलि स्वरुप उनकी प्रस्तुति की वीडियो रिकार्डिंग फेसबुक लाइव की गई। उनके पिछले वर्ष के कार्यक्रम का एक अंश उन्हें समर्पित किया गया।

अपने नई दिल्ली स्थित आवास पर रिकार्ड की गई बंदिश उन्होंने समारोह के लिए भेजी थी। इसे मंदिर प्रबंध ने प्रसारित करने के साथ ही सहेज कर रख लिया था। कार्यक्रम की अगली प्रस्तुति में पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र के शिष्य भगीरथ जालान ने गायन प्रस्तुति के लिए जुड़े। उन्होंने राग यमन में निबद्ध रचना "तोरे चरणन में" के माध्यम से श्रोताओं को भाव विभोर किया। पंडित ललित कुमार ने तबला पर एवं पंकज मिश्रा ने हारमोनियम पर उनका सहयोग प्रदान किया।

अगली प्रस्तुति कथक नृत्य की रही, जिसमें बनारस घराने के युवा प्रतिभाशाली कलाकार विशाल कृष्णा ने प्रस्तुति दी। उन्होंने शिव स्त्रोतम से अपने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद उन्होंन तीन ताल में पारंपरिक कथक की प्रस्तुति दी। तबले पर कुशाल कृष्णा एवं हारमोनियम और गायन पर गौरव मिश्रा ने सहयोग प्रदान किया।

कार्यक्रम की चौथी प्रस्तुति सितार वादन की रही। दिल्ली से ऑनलाइन हुए युवा सितारवादक मेहताब अली नियाज़ी की रही। भिंडीबाजार मुरादाबाद घराने के ख्यात उस्ताद मोहसीन अली नेयाजी के पुत्र एवं शिष्य मेहताब ने अपने वादन पं राजन मिश्र को समर्पित किया। उन्होंने राग मालकौंस में आलाप, जोड़ एवं झाला बजाकर सुनाया। तबला पर उनका सहयोग खुर्रम अली ने दिया।

निशा की पांचवीं प्रस्तुति मेवाती घराने के प्रतिनिधि कलाकार एवं पंडित जसराज के शिष्य हेमांग मेहता पुणे से गायन की प्रस्तुति के लिए जुड़े। उन्होंने राग जोग में अपनी प्रस्तुति अर्पित की। कार्यक्रम की अगली प्रस्तुति में बनारस से नीरज मिश्र सितार वादन की प्रस्तुति के लिए जुड़े। उन्होंने राग कौशी कान्हड़ा में आलाप, जोड़ एवं झाला की प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम की अगली कड़ी में ग्वालियर घराने की श्रीमती इंद्राणी दासगुप्ता गायन की प्रस्तुति के लिए जुड़ीं। अंतिम प्रस्तुति सारंगी वादन की रही। ख्यात कलाकार संदीप मिश्र एवं संगीत मिश्र ने सारंगी युगल वादन की अनुपम प्रस्तुति दी। उनको तबला वादन के माध्यम से अमित मिश्र ने सहयोग प्रदान किया। उन्होंने अंत में राग मिश्र भैरवी में निबद्ध दादरा "चला रे परदेसिया नैना मिलाइके" सुनकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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