अप्रैल माह में दीवानी कचहरी में 30 अधिवक्ताओं की हुई मौत, इनमें से 90 प्रतिशत हुए थे संक्रमित 

अप्रैल माह में दीवानी कचहरी में 30 अधिवक्ताओं की हुई मौत, इनमें से 90 प्रतिशत हुए थे संक्रमित

वाराणसी। कोरोना का संक्रमण इस समय बहुत ही खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है। इस संक्रमण शहर की दीवानी कचहरी पर भी वज्रपात हुआ है जबकि अप्रैल के महीने में ज़यादातर कचहरी बंद ही रही है। उसके बावजूद कचहरी के 30 अधिवक्ताओं की मौत हुई है, जिसमे से 90 प्रतिशत कोरोना से संक्रमित थे। अधिवक्ता बंधुओ की मौत के बाद अधिवक्ताओं में आक्रोश है।  

 इसके अलावा इस महामारी के दौर में जिला जज समेत 24 न्यायिक अधिकारी और उनके परिजन भी संक्रमित हुए। इसके अलावा अदालत कर्मी और अधिवक्ता भी बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित हुए।

इन आकड़ों के सामने आने के बाद अधिवक्ताओं ने मांग की है कि जिन अधिवक्ताओं की मौत हुई है उनके परिजनों को पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद सरकार दे। सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कुमार उपाध्याय और बनारस बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद कुमार पांडेय ने साथी अधिवक्ताओं से घर में ही सुरक्षित रहने की अपील की है। वहीं अधिवक्ताओं की मृत्यु और उनके संक्रमण पर यूपी बार काउंसिल की चुप्पी को लेकर वकीलों ने हैरानी जताई है।

इन अधिवक्ताओं की हुई मौत 
दीवानी कचहरी के जिन अधिवक्ताओं की मौत हुई है उनमें सुहैल अंसारी, ज्ञानचंद्र खत्री, विकास कुमार सिंह, अजय शंकर पांडेय, अजया नंद मिश्र, आशीष पटेल, अनिल कुमार वर्मा, डीपी श्रीवास्तव, वसीम खान, बाबू आनंद राय, इंद्र विशाल दीक्षित, कृपा शंकर सिंह, सीताराम, जयशंकर लाल श्रीवास्तव, अरुण कुमार श्रीवास्तव, केएलके चंदानी, राधिका रमण लाल श्रीवास्तव, डॉ. रविंद्र प्रताप सिंह रंजन, श्रीपति नरायन सिंह, राजेंद्र श्रीवास्तव, मुकुंद नरायन सिंह, जयप्रकाश सिंह जेपी, अमरेश पांडेय, सतीश उपाध्याय, यतींद्र नरायन सिंह, योगेंद्र नारायण सिंह, आमोल सिन्हा, श्याम नरायन, मुरलीमनोहर सिन्हा और मंगला प्रसाद तिवारी शामिल हैं।

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