विश्व सांस्कृतिक धरोहर ‘रम्माण’ का मुख्य समारोह 26 अप्रैल को

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विश्व सांस्कृतिक धरोहर ‘रम्माण’ का मुख्य समारोह 26 अप्रैल को


विश्व सांस्कृतिक धरोहर ‘रम्माण’ का मुख्य समारोह 26 अप्रैल को


ज्योतिर्मठ, 14 अप्रैल (हि.स.)। सीमांत पैनखंडा ज्योतिर्मठ के सलूड़-डुंग्रा गांव में आयोजित होने वाले विश्व सांस्कृतिक धरोहर ‘रम्माण’ का मुख्य समारोह इस वर्ष 26 अप्रैल को होगा। बैसाखी पर्व के अवसर पर भूमि क्षेत्रपाल देवता मंदिर परिसर में महापंचायत के दौरान पंचांग गणना के बाद शुभ मुहूर्त की घोषणा की गई।

रम्माण के संयोजक डॉ.कुशल भण्डारी ने एक भेंट में बताया कि यह पौराणिक धार्मिक अनुष्ठान हजारों वर्षों से क्षेत्रीय आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा रहा है। उन्होंने बताया कि 8 वीं सदी में आदि शंकराचार्य के ज्योतिर्मठ आगमन के दौरान इस परंपरा को विस्तार मिला।

इससे पूर्व भूमि क्षेत्रपाल देवता अपने निशान और कंडियों के साथ पारंपरिक वाद्य यंत्रों के बीच चोपता स्थित मूल मंदिर पहुंचे, जहां उनका विधि-विधान से श्रृंगार किया गया। इसके बाद गांव के युवाओं ने मंदिर चौक में विशेष ताल पर देव निशान का पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया।

आगामी 12 दिनों तक क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान, क्षेत्र भ्रमण, मिलन कार्यक्रम और रात्रिकालीन मुखौटा नृत्य आयोजित किए जाएंगे। आयोजन की तैयारियों को लेकर पंचायत ने विभिन्न जिम्मेदारियों का वितरण भी किया।

वर्ष 2025 से दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा रम्माण पर शोध कार्य किया जा रहा है, जिसके तहत शोधकर्ता सलूड़-डुंग्रा गांव पहुंच चुके हैं। साथ ही पर्यटन विभाग उत्तराखंड द्वारा इस आयोजन का अभिलेखीकरण भी किया जा रहा है।

संयोजक ने बताया कि मेले में पुष्कर सिंह धामी, सतपाल महाराज, ऋतु खण्डूरी भूषण, महेन्द्र भट्ट सहित कई जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है।

हिन्दुस्थान समाचार / प्रकाश कपरुवाण

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