रिस्पना–बिंदाल एलिवेटेड कॉरिडोर पर पुनर्विचार की मांग : अमित बघेल

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देहरादून, 16 जनवरी (हि.स.)। देहरादून सिटीजन फोरम की रिस्पना–बिंदाल नॉलेज सीरीज के दूसरे सत्र में शहरी मोबिलिटी विशेषज्ञ अमित बघेल ने प्रस्तावित रिस्पना–बिंदाल एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना पर पुनर्विचार की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि एलिवेटेड सड़कें ट्रैफिक जाम को कम नहीं करतीं, बल्कि लंबे समय में समस्या और बढ़ाती हैं।

ऑनलाइन आयोजित इस कार्यक्रम में बघेल ने कहा कि टियर–2 शहरों की असली जरूरत मजबूत सार्वजनिक परिवहन, सुरक्षित फुटपाथ और पैदल चलने योग्य सड़कें हैं, न कि महंगी एलिवेटेड सड़कें।

उन्होंने बताया कि लोग यह तय नहीं करते कि वे पैदल चलेंगे या वाहन से जाएंगे, बल्कि शहर की सड़क संरचना यह तय करती है।

जहां फुटपाथ और सार्वजनिक परिवहन नहीं होते, वहां लोग मजबूरी में निजी वाहन अपनाते हैं। चौड़ी सड़कें और एलिवेटेड रोड अधिक वाहनों को आकर्षित करती हैं, जिससे कुछ समय बाद वे भी जाम हो जाती हैं। इसे इंड्यूस्ड डिमांड कहा जाता है।

अमित बघेल ने कहा कि एलिवेटेड रोड पर चलने वाले वाहनों को अंततः नीचे उतरना ही पड़ता है, जिससे एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स पर भारी जाम लग जाता है।

अब तक कोई भी शहर इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं खोज पाया है।

नदियों के ऊपर एलिवेटेड सड़क बनाने पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि यह न केवल पर्यावरण और नदी तंत्र को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि आसपास के रिहायशी इलाकों, फुटपाथों और स्थानीय सड़कों पर भी नकारात्मक असर डालता है।

उन्होंने जोर दिया कि देहरादून जैसे शहर में छोटी दूरी की यात्राओं के लिए पैदल चलना और साइकिल सबसे बेहतर विकल्प हैं, लेकिन फुटपाथों की कमी लोगों को वाहन इस्तेमाल करने पर मजबूर करती है। वर्तमान में सार्वजनिक परिवहन की हिस्सेदारी मात्र 6 प्रतिशत है, जिसे बेहतर सेवाओं से बढ़ाया जा सकता है।

देहरादून की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए उन्होंने कहा कि यहां मेट्रो जैसी परियोजनाएं व्यवहारिक नहीं हैं। उन्होंने 2019 में बने और 2024 में अपडेट हुए देहरादून कम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें कई अच्छे सुझाव हैं, लेकिन सवाल यह है कि कितने सुझाव वास्तव में लागू होंगे।

उन्होंने मांग की कि यदि रिस्पना–बिंदाल पर एलिवेटेड रोड बनाई जाती है, तो उसके पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों की पूरी जानकारी पारदर्शी तरीके से जनता के सामने रखी जाए। नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि यह परियोजना शहर की पहचान और पर्यावरण को कैसे प्रभावित करेगी।

भारती जैन ने सार प्रस्तुत किया और अनूप नौटियाल ने बताया कि रिस्पना–बिंदाल नॉलेज सीरीज़ आगे भी जारी रहेगी। कार्यक्रम का संचालन देहरादून सिटीजन फोरम की ऋतु चटर्जी ने किया। इस ऑनलाइन बैठक में देहरादून सिटीजन फोरम के 40 से अधिक स्थानीय सदस्य शामिल हुए।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल

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