डीबीटी व्यवस्था पर उठे सवाल, छात्रवृत्ति भुगतान में फंसा चंपावत
चंपावत, 05 जनवरी (हि.स.)। चंपावत में छात्रवृत्ति भुगतान के लिए लागू डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) व्यवस्था पर सवाल उठ गए हैं। फेडरेशन ऑफ मिनिस्टीरियल सर्विसेज एसोसिएशन ने इस प्रणाली को अव्यवहारिक बताते हुए प्रशासन से तत्काल सुधार की मांग की है। संगठन ने जिलाधिकारी और मुख्य शिक्षा अधिकारी चम्पावत के साथ हुई बैठक में अपनी चिंताएं व्यक्त कीं।
बैठक में बताया गया कि बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के बैंक खाते नहीं हैं, जबकि कई खाते आधार से लिंक नहीं हैं या निष्क्रिय पड़े हैं। नेपाली मूल के छात्रों के खाते न खुल पाने से भी डीबीटी प्रक्रिया जटिल हो गई है। अकेले विकासखंड चम्पावत में 7,500 से अधिक विद्यार्थियों को मौजूदा प्रणाली के तहत डीबीटी में शामिल करना संभव नहीं हो पा रहा है।
इसके अतिरिक्त, उप शिक्षा अधिकारी कार्यालय में कर्मचारियों की कमी के कारण ऑनलाइन डाटा प्रविष्टि का कार्य भी समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है। संगठन ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य के अन्य जनपदों में विद्यालय स्तर से डीबीटी व्यवस्था सफलतापूर्वक लागू की जा चुकी है। इसके बावजूद चम्पावत में उसी मॉडल को लागू न करना समझ से परे है।
ऐजुकेशनल मिनिस्टीरियल ऑफिसर्स एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि शीघ्र ही विद्यालय स्तर पर डीबीटी व्यवस्था लागू की जाए। पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि अव्यवहारिक व्यवस्था के कारण छात्रवृत्ति की धनराशि समर्पित होती है, तो इसकी जिम्मेदारी मिनिस्टीरियल कार्मिकों की नहीं होगी।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि कर्मचारियों पर किसी भी स्तर पर दबाव बनाने की स्थिति में संगठन आंदोलन के लिए बाध्य होगा। इस बैठक में फेडरेशन के महामंत्री जीवन चन्द्र ओली, जिलाध्यक्ष नागेन्द्र कुमार जोशी, महामंत्री हिमांशु मुरारी, संरक्षक कैलाश नाथ महंत और उपाध्यक्ष लोधन कुमार त्रिपाठी सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / राजीव मुरारी

