जेसीबी मशीन से सहारे कूपड़ा खड्ड को पार कर रहे ग्रामीण व स्कूली बच्चे

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जेसीबी मशीन से सहारे कूपड़ा खड्ड को पार कर रहे ग्रामीण व स्कूली बच्चे


उत्तरकाशी, 08 अगस्त (हि.स.)। आपदा के बाद बीते एक साल से गीठ पट्टी क्षेत्र के कुपड़ा, कुनसाल और त्रिखली गांव के ग्रामीणों के लिए बरसात का सीजन मुश्किलों भरा बना हुआ है। यहां पुल के क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीणों को आवागमन के लिए उफनाये खड्ड को जान जोखिम में डाल कर पार करने को विवश हैं।

आजकल कुपड़ा खड्ड पर निर्माणाधीन बैली ब्रिज के लिए मौजूद जेसीबी मशीन के द्वारा ग्रामीणों को जरुरत पड़ने पर आर पार करवाया जा रहा है, ताकि किसी प्रकार की हनहोनी से बचा जा सके। ईई नवीन ध्यानी ने कहा कि बारिश और खड्ड पर मलवा पत्थरों के आने से निर्माण कार्य में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है जल्द पुल निर्माण कार्य पूरा होने की उम्मीद है, फिर भी मशीनों से ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है स्कूली बच्चों को भी सुरक्षित पार कराया जा सके।

बता दें कि पिछले वर्ष आई आपदा में कुपड़ा खड्ड पर बना मोटर पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पुल का पुनर्निर्माण नहीं हो सका है। आवागमन बहाल करने के लिए यहां बेली ब्रिज का निर्माण शुरू किया जा रहा है, लेकिन इस वैली ब्रिज की एक ओर की एप्रोच लंबे समय से अधूरी पड़ी है।

एप्रोच तैयार न होने के कारण पुल का लाभ ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को नहीं मिल पा रहा है। मजबूरी में बच्चे उफनते खड्ड को पार कर स्कूल पहुंच रहे हैं, जिससे हर दिन हादसे की आशंका बनी रहती है।

ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान स्थिति और भी भयावह हो जाती है। कई बार खड्ड का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है और पहाड़ी से पत्थर गिरने लगते हैं।

इसके बावजूद बच्चों को शिक्षा के लिए यही जोखिम भरा रास्ता अपनाना पड़ रहा है। कहा कि बीते साल आपदा के दौरान आवागन के लिए ट्रॉली की भी व्यवस्था की गई थी लेकिन वह भी हटा दी गयी जो ग्रामीणों और स्कूली बच्चों के काम नही आई।

हिन्दुस्थान समाचार / सुरेन्द्र नौटियाल

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