कांग्रेस के सामने सरकार का नहीं, अपना राजनीतिक अस्तित्व बचाने की चुनौती : मनवीर चौहान

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कांग्रेस के सामने सरकार का नहीं, अपना राजनीतिक अस्तित्व बचाने की चुनौती : मनवीर चौहान


कांग्रेस के सामने सरकार का नहीं, अपना राजनीतिक अस्तित्व बचाने की चुनौती : मनवीर चौहान


देहरादून, 28 जून (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान ने रविवार को कांग्रेस की प्रस्तावित परिवर्तन एवं संकल्प यात्रा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यात्रा शुरू होने से पहले ही पार्टी के सामने संगठनात्मक चुनौतियां और अंदरूनी मतभेद उजागर हो गए हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के लिए सरकार का विकल्प बनने से अधिक अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखना बड़ी चुनौती है।

भाजपा प्रदेश कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मनवीर चौहान ने कहा कि कांग्रेस की प्रस्तावित यात्रा को लेकर न तो जनता में उत्साह दिखाई दे रहा है और न ही पार्टी कार्यकर्ताओं में अपेक्षित जोश है। उन्होंने कहा कि यात्रा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत जैसे वरिष्ठ नेताओं की सक्रिय भूमिका दिखाई नहीं दे रही है, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस लंबे समय से गुटबाजी से जूझ रही है और वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा को लेकर समय-समय पर सार्वजनिक बयान भी सामने आते रहे हैं। उनका कहना था कि ऐसे माहौल में यात्रा की सफलता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

मनवीर चौहान ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की जनता के प्रति जवाबदेही होती है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2012 में जनता ने कांग्रेस को अवसर दिया, लेकिन तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में नेतृत्व को लेकर विवाद, गुटीय संघर्ष और कथित घोटालों के कारण जनता का विश्वास कमजोर हुआ। उन्होंने कहा कि इसके बाद मतदाताओं ने कांग्रेस को लगातार नकारा है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुनाव से पहले जनता के बीच जाने का प्रयास कर रही है, लेकिन जिन मुद्दों को लेकर वह सरकार को घेरना चाहती है, उन पर जनता पहले ही अपना मत स्पष्ट कर चुकी है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा विकास कार्यों और सरकार की उपलब्धियों के आधार पर लगातार जनता के बीच सक्रिय है तथा उसे जनसमर्थन प्राप्त हो रहा है।

मनवीर चौहान ने कहा कि भाजपा के सामने कोई कठिन राजनीतिक लक्ष्य नहीं है, जबकि कांग्रेस के सामने संगठन के भीतर मतभेदों को दूर करने और अपने राजनीतिक अस्तित्व को बनाए रखने की दोहरी चुनौती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

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