कन्या गुरुकुल में सम्मोहन चिकित्सा पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित
हरिद्वार, 24 मार्च (हि.स.)। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के कन्या गुरुकुल परिसर हरिद्वार के मनोविज्ञान विभाग में सम्मोहन चिकित्सा (हिप्नोथेरेपी) पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में मनोवैज्ञानिक सलाहकार निधि कोटियाल और सम्मोहन चिकित्सक ताशी गर्ग (नोएडा, उत्तर प्रदेश) ने भाग लिया।
कार्यशाला की शुरुआत करते हुए निधि कोटियाल ने बताया कि हिप्नोथेरेपी का इतिहास 4000 से अधिक वर्ष पुराना है, जिसकी जड़ें प्राचीन भारत, मिस्र और ग्रीस की आध्यात्मिक चिकित्सा प्रणालियों में मिलती हैं। प्राचीन समय में साधु-संतों, तांत्रिकों और पुजारियों द्वारा मंत्र, वशीकरण और एकाग्रता के माध्यम से सम्मोहन जैसी अवस्था का उपयोग रोगों के उपचार और चेतना में परिवर्तन के लिए किया जाता था। बाद में मनोविश्लेषण के जनक सिगमंड फ्रायड ने भी हिस्टीरिया के उपचार में हिप्नोसिस का उपयोग किया।
उन्होंने बताया कि हिप्नोथेरेपी एक वैज्ञानिक और प्रभावी चिकित्सा पद्धति है, जिसका उपयोग दर्द प्रबंधन, चिंता, बुरी आदतों को छोड़ने और व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए किया जाता है। हिप्नोथेरेपी की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि प्रशिक्षित थेरेपिस्ट गहरी सांस लेने, कल्पना करने और ध्यान केंद्रित करने के निर्देश देकर व्यक्ति को ट्रांस की अवस्था में ले जाता है।
इस दौरान मस्तिष्क की तरंगें गामा से बीटा, अल्फा और फिर थीटा तरंगों की ओर जाती हैं। थीटा अवस्था में मस्तिष्क अत्यधिक शांत और सृजनात्मक होता है तथा व्यक्ति सुझावों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिप्नोथेरेपी कोई जादू नहीं है और न ही इसमें व्यक्ति को पूरी तरह वश में किया जा सकता है। सम्मोहन चिकित्सक ताशी गर्ग ने छात्राओं को विभिन्न प्रकार की विश्राम तकनीकों की जानकारी दी और उनका अभ्यास भी कराया। कार्यशाला का संचालन डॉ. सुनीता रानी, डॉ. ऋचा सक्सेना और डॉ. पारूल मलिक ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में दीपा साहू, हरिराम तथा शोध छात्रा मणिका गुप्ता और भव्या अरोड़ा का विशेष सहयोग रहा।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

