उत्तरकाशी : बिना बर्फ फीका नया साल

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उत्तरकाशी : बिना बर्फ फीका नया साल


उत्तरकाशी, 02 जनवरी (हि.स.)। नए साल के जश्न के लिए जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल दयारा बुग्याल, गिडारा बुग्याल, हर्षिल घाटी और केदारकांठ हर साल सैलानियों से गुलजार रहते हैं। बर्फ से ढकी वादियां, ठंड में जश्न और प्राकृतिक नजारे पर्यटकों को खासा आकर्षित करते हैं, लेकिन इस बार मौसम की बेरुखी ने सैलानियों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। बर्फबारी न होने से बड़ी संख्या में पहुंचे पर्यटक मायूस होकर लौट गए।

हर साल दिसंबर के अंतिम सप्ताह और नए साल के मौके पर सैकड़ों की संख्या में देश-प्रदेश से सैलानी यहां बर्फ का आनंद लेने पहुंचते हैं। होटल, होम स्टे, टैक्सी और स्थानीय कारोबारियों को इस सीजन से अच्छी आमदनी होती है। मगर इस बार न तो बारिश हुई और न ही बर्फबारी, जिससे पर्यटन स्थलों की रौनक फीकी नजर आई। दयारा और गिडारा बुग्याल में बर्फ की आस में पहुंचे पर्यटकों को खाली पहाड़ देखकर निराशा हाथ लगी। हर्षिल घाटी, जिसे शीतकालीन पर्यटन का हॉट स्पॉट माना जाता है, वहां भी बर्फ का नामोनिशान नहीं रहा। चौरंगी खाल में भी वहीं हालात देखने को मिले।

सैलानियों का कहना है कि वे लंबा सफर तय कर सिर्फ बर्फ देखने आए थे, लेकिन मौसम ने साथ नहीं दिया। मौसम की इस बेरुखी का सीधा असर होटल, होम स्टे और स्थानीय व्यवसाय पर पड़ा है। होटल संचालकों का कहना है कि कई बुकिंग रद्द हो गई, वहीं कई पर्यटक एक-दो दिन रुककर वापस लौट गए। टैक्सी चालकों, ढाबा संचालकों और स्थानीय दुकानदारों को भी नुकसान झेलना पड़ा है।

पर्यटन कारोबार से जुड़े मोरी क्षेत्र के राजपाल रावत,भंगेली गाँव के पूर्व प्रधान प्रवीण प्रज्ञान, हर्षिल के पूर्व प्रधान दिनेश रावत, राजीव रावत सुरजीत टौलिया, माधवेन्द्र रावत, अरबिंद बुटोला, अनिल राणा, दयारा पर्यटन से जुड़े राजकेंद्र थनवाण आदि लोगों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में बर्फबारी नहीं हुई तो शीतकालीन पर्यटन पूरी तरह प्रभावित हो सकता है। उन्होंने सरकार से वैकल्पिक विंटर टूरिज्म गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ ही इस वक्त समय गवाएं बिना सड़क के चौड़ीकरण करने को बीआरओ बोलना चाहिए जिससे यात्रा सीजन में कोई असर न पड़ेच्द्य उन्होंने गंगोत्री हाईवे के सोनगाड, डबरानी की स्थिति को बताते हुए कहा कि यदि समय रहते इन जगह पर सड़क का चौड़ीकरण न हुआ तो यात्रा सीजन में भी लोगो के हाथ निराशा ही हाथ लगेगी, साथ ही पर्यटन स्थलों के प्रचार की मांग भी की, ताकि स्थानीय लोगों की आजीविका पर पड़ रहे असर की कुछ कम किया जा सके।

हिन्दुस्थान समाचार / चिरंजीव सेमवाल

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