आपदा जोखिम को कम करने में अकादमिक शोध की भूमिका अहम
पौड़ी गढ़वाल, 15 अप्रैल (हि.स.)। हिमालयी लोक संपदा परिषद, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय और त्रिलोचन उप्रेती स्मृति हिमालयी शोध संस्थान की सहभागिता से गोविंद बल्लभ पंत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान घुड़दौड़ी में सस्टेनेबल इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर कार्यशाला का आयोजन कियया गया।
कार्यशाला का उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशील पारिस्थितिकी में सतत अवसंरचना विकास एवं आपदा जोखिम न्यूनीकरण के साथ-साथ पारंपरिक ज्ञान एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को बढ़ावा देना था।
बुधवार को आयोजित कार्यशाला में कार्यशाला के संरक्षक भगवती प्रसाद राघव ने हिमालयी क्षेत्र में सांस्कृतिक विरासत एवं पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण के साथ सतत विकास को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। निदेशक प्रो. वीके बंगा ने पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यावरण-संवेदी, सतत इंजीनियरिंग समाधानों की महत्ता को रेखांकित किया। डा. आशीष बहुगुणा ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए पारंपरिक ज्ञान एवं आधुनिक तकनीकों के समंवय पर प्रकाश डाला।
कार्यशाला में उत्तराखंड तकनीकी विवि की कुलपति डा. ठाकुर ने हिमालयी क्षेत्र में सतत एवं पर्यावरण-अनुकूल अवसंरचना अपनाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। कहा कि आपदा जोखिम को कम करने में तकनीकी नवाचार एवं अकादमिक शोध की महत्वपूर्ण भूमिका है और पर्वतीय क्षेत्रों में विकास कार्य पर्यावरण संरक्षण के अनुरूप होने चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को प्रेरित करते हुए क्षेत्र-विशिष्ट व्यावहारिक समाधान विकसित करने तथा पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों के साथ समन्वित करने पर जोर दिया। इस मौके पर उत्तराखंड ओपन विवि के कुलपति नवीन चंद्र लोहनी, राम हिमालयन विवि के कुलपति डा. राजेंद्र डोभाल, डा. नरेंद्र सिंह, डा. संदीप सिंह, डा.जसपाल सिंह चौहान डा.पीवीबी सुब्रमण्यम आदि शामिल रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / कर्ण सिंह

