ग्लेशियर झीलों से संभावित आपदा के जोखिम न्यूनीकरण पर कार्यशाला आयोजित
नैनीताल, 02 नवंबर (हि.स.)। डॉ. आरएस टोलिया उत्तराखंड प्रशासनिक अकादमी में ग्लेशियर यानी हिमनदों की झीलों के फटने से उत्पन्न बाढ़ (जीएलओएफ) के जोखिम और प्रबंधन रणनीतियों पर कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें विशेषज्ञों ने हिमनद झीलों की निगरानी, संवेदनशील क्षेत्रों के वैज्ञानिक आकलन और पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करने पर जोर दिया। कार्यशाला में विभिन्न विभागों एवं संस्थानों के 120 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
कार्यशाला का शुभारंभ आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग के अपर सचिव प्रकाश चंद्रा, एनडीएमए के मेजर जनरल सुधीर बहल, पद्मश्री अनूप साह, डॉ. शेखर पाठक और अकादमी के संयुक्त निदेशक डॉ. महेश कुमार ने संयुक्त रूप से किया। श्री चंद्रा ने बताया कि हिमनद झीलों का वैज्ञानिक अध्ययन और जोखिम आकलन किया जा रहा है तथा संवेदनशील क्षेत्रों में पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित करने की दिशा में कार्य चल रहा है।
मेजर जनरल बहल ने सिक्किम में हिमनद झील फटने से आई आपदा के अनुभव साझा करते हुए समय पर चेतावनी, त्वरित प्रतिक्रिया और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को जरूरी बताया। तकनीकी सत्र में वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान, आईआईआरएस, सीबीआरआई, जीबी पंत विश्वविद्यालय, कुमाऊं विश्वविद्यालय सहित विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों ने हिमनद झीलों की पहचान, निगरानी, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और आपदा प्रबंधन पर विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मंजू पांडे ने किया।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी

