अतीत के झरोखे से : जब एनडी तिवारी ने गांधी परिवार के प्रति अपनी निष्ठा दिखाने के लिये जब्त करा दी थी कांग्रेस की जमानत

अतीत के झरोखे से : जब एनडी तिवारी ने गांधी परिवार के प्रति अपनी निष्ठा दिखाने के लिये जब्त करा दी थी कांग्रेस की जमानत
अतीत के झरोखे से : जब एनडी तिवारी ने गांधी परिवार के प्रति अपनी निष्ठा दिखाने के लिये जब्त करा दी थी कांग्रेस की जमानत


नैनीताल, 03 अप्रैल (हि.स.)। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री पं. नारायण दत्त तिवारी की पहचान अपने दौर के दिग्गज कांग्रेस नेता के रूप में होती है, हालांकि यह भी सच है कि उनकी राजनीति में शुरुआत लाल टोपी वाली प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से हुई थी और उनके जीवन के अंतिम दिनों में उनके अपने पुत्र रोहित के लिये भाजपा का टिकट चाहने की भी चर्चा थी। अलबत्ता यहां हम उस राजनीतिक अतीत की चर्चा कर रहे हैं, जब तिवारी ने कांग्रेस पार्टी को दो सीटों पर नाकों चने चबवा दिये थे। यही नहीं, नैनीताल सीट पर तो कांग्रेस प्रत्याशी की जमानत भी जब्त हो गयी थी।

यह देश-प्रदेश की राजनीतिक का कम चर्चा में रहा अध्याय है कि 1963 में कांग्रेस में शामिल होने के बाद कांग्रेस की सरकारों में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बनने के साथ केंद्र में कई बार मंत्री रहे पं. तिवारी ने 1994 में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मध्य प्रदेश से आने वाले अर्जुन सिंह के साथ मिलकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (तिवारी) नाम से पार्टी बनाई। इसी पार्टी के ‘फूल चढ़ाती महिला’ के चुनाव चिन्ह पर उन्होंने 1996 के आम चुनाव में लोकसभा का चुनाव लड़ा। इस चुनाव में तिवारी-कांग्रेस के तीन उम्मीदवार तिवारी स्वयं नैनीताल से, मौजूदा काबीना मंत्री सतपाल महाराज गढ़वाल सीट से और शीशराम ओला राजस्थान से विजयी रहे थे। हालांकि बताया जाता है कि तिवारी ने अपनी पार्टी बनाने का यह निर्णय सोनिया गांधी और गांधी परिवार के प्रति अपनी निष्ठा दिखाने के लिये ही उठाया था। क्योंकि तब गांधी परिवार के इतर सीताराम केसरी कांग्रेस पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष बने थे। इस तथ्य की पुष्टि इस बात से भी होती है कि चुनाव के बाद सोनिया गांधी के हस्तक्षेप के बाद तिवारी ने अपनी पार्टी का कांग्रेस पार्टी में ही विलय करा दिया था।

इस चुनाव में नैनीताल सीट पर तिवारी के विरुद्ध कांग्रेस से हरीश रावत के करीबी प्रयाग दत्त भट्ट को टिकट मिला था। इस चुनाव के दौरान अधिकांश कांग्रेसियों के तिवारी के साथ चले जाने से पार्टी को प्रचार के लिए कार्यकर्ता मिलना भी मुश्किल हो गया था और परिणामस्वरूप एनडी तिवारी ने तीन लाख से अधिक वोट प्राप्त कर जीत दर्ज की। दूसरे स्थान पर रहे भाजपा उम्मीदवार को 1.51 लाख से अधिक मत मिले। जबकि पांचवें स्थान पर रहे कांग्रेस उम्मीदवार भट्ट को मात्र 15,612 मत मिले और उनकी जमानत तक जब्त हो गई थी।

हिन्दुस्थान समाचार/डॉ.नवीन जोशी/रामानुज

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