ऑनलाइन प्राप्त खतौनी की ई-भूलेख पोर्टल से पुष्टि करें, अनावश्यक तहसील भेजने पर रोक
नैनीताल, 24 अगस्त (हि.स.)। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने जनपद के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि उत्तराखंड सरकार के अधिकृत ई-भूलेख पोर्टल से आम लोगों द्वारा स्वयं प्राप्त की गई कंप्यूटरीकृत खतौनी को केवल इस आधार पर अस्वीकार न किया जाए कि उसे संबंधित व्यक्ति ने ऑनलाइन डाउनलोड किया है। उन्होंने कहा कि इससे लोगों को अनावश्यक रूप से तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं, इसलिए जहां ऑनलाइन खतौनी का विवरण उपलब्ध अभिलेखों से मिलान योग्य हो, उसे स्वीकार किया जाए।
जिलाधिकारी ने जनपद स्तरीय अधिकारियों, उप जिलाधिकारियों और तहसीलदारों को जारी आदेश में कहा कि राज्य में भू-अभिलेखों के कंप्यूटरीकरण की व्यवस्था लागू है और सभी तहसीलों से कंप्यूटरीकृत खतौनी की प्रतियां जारी की जा रही हैं। आम नागरिक निर्धारित शुल्क ऑनलाइन जमा कर अधिकृत ई-भूलेख पोर्टल से खतौनी प्राप्त कर सकता है। संज्ञान में आया है कि कुछ विभागीय कार्यालय ऑनलाइन प्राप्त खतौनी को स्वीकार करने के बजाय लोगों को पुनः तहसील कार्यालय से उसकी प्रति लाने के लिए कह रहे हैं। डीएम ने स्पष्ट किया कि यदि ऑनलाइन प्राप्त खतौनी का विवरण पोर्टल पर उपलब्ध अभिलेख से मेल खाता है तो उसे स्वीकार किया जाए और केवल ऑनलाइन डाउनलोड किए जाने के आधार पर अस्वीकार न किया जाए।
भूमि संबंधी प्रकरण में खतौनी की आवश्यकता होने पर व्यक्ति को दोबारा तहसील से वही दस्तावेज लाने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा, जब तक किसी विशेष अधिनियम, नियम, शासनादेश या सक्षम प्राधिकारी के आदेश के तहत प्रमाणित प्रति अथवा मूल अभिलेख की आवश्यकता निर्धारित न हो। यदि खतौनी में नाम, खाता संख्या, खसरा संख्या अथवा अन्य अभिलेखीय विवरण को लेकर कोई संदेह या अंतर पाया जाता है तो संबंधित विभाग व्यक्ति को अनावश्यक रूप से तहसील भेजने के बजाय ई-भूलेख पोर्टल पर उसका सत्यापन करे अथवा संबंधित विभाग से समन्वय स्थापित कर जानकारी की पुष्टि करे। जिलाधिकारी ने कहा कि आम जनता को एक ही दस्तावेज के लिए अनावश्यक रूप से तहसील कार्यालय भेजना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी

