यूजीसी कानून सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाला, वापस ले सरकार

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हरिद्वार, 11 अक्टूबर (हि.स.)। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की उत्तराखंड इकाई की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में यूजीसी कानून को लेकर नाराजगी जताई गई। कनखल स्थित राजपूत धर्मशाला में प्रदेश कार्यालय पर हुई बैठक में पदाधिकारियों ने कहा कि यह कानून सामाजिक सौहार्द और समरसता को प्रभावित कर सकता है।

सरकार से इसे वापस लेने की मांग की गई।

प्रदेश अध्यक्ष यशपाल सिंह राणा की अध्यक्षता में हुई बैठक में आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की गई। हरिद्वार में होने वाले आयोजनों में विभिन्न सामाजिक और गैर-राजनीतिक संगठनों को एक मंच पर लाने, यूजीसी प्रावधानों, आर्थिक आधार पर आरक्षण, महापुरुषों के इतिहास के संरक्षण और सामाजिक समरसता जैसे मुद्दों पर चर्चा का निर्णय लिया गया।दशहरा पर शस्त्र और शास्त्र पूजन को भव्य रूप से मनाने का भी फैसला हुआ।

प्रदेश महामंत्री डॉ. शिवकुमार चौहान ने कहा कि सवर्ण समाज के महापुरुषों ने समरसता और बिना भेदभाव सभी की रक्षा के लिए बलिदान दिया है।सामाजिक सुरक्षा के नाम पर समाज को विभाजित करने की राजनीति हो रही है, जिसका असर दूसरे वर्गों पर भी पड़ेगा। सरकार सार्थक पहल कर कानून वापसी की घोषणा करे।

प्रदेश उपाध्यक्ष प्रेम सिंह राणा, महेंद्र सिंह नेगी ने इसे समाज में बिखराव पैदा करने वाला बताया। जिला अध्यक्ष शेखर राणा ने कहा कि इससे संगठनात्मक एकता को नुकसान पहुंचेगा। जिला महामंत्री सुशील पुंडीर और प्रकाश चंद चौहान ने कहा कि जनप्रतिनिधियों के बीच बढ़ता विरोध सरकार के विकास कार्यों के लिए चुनौती बन सकता है।

बैठक में तय हुआ कि मांगों को लेकर महासभा का प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल ले.ज. (से.नि.) गुरमीत सिंह को राजभवन में ज्ञापन सौंपेगा। बैठक में अजय चौहान, डॉ. बिजेंद्र चौहान, पूर्व चेयरमैन कृष्णपाल चौहान सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

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