शिवालय नहीं, स्कूल में गुरु का करेंगे अभिषेक, सोनीपत के स्कूली कांवड़ियों ने जीवंत की प्राचीन गुरु-परंपरा
हरिद्वार, 08 अगस्त (हि.स.)। कांवड़ मेला अपने चरम पर है। देश के विभिन्न राज्यों से लाखों कांवड़िए हरिद्वार पहुंचकर मां गंगा से जल भर रहे हैं और शिवरात्रि पर अपने-अपने क्षेत्रों में भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए रवाना हो रहे हैं। इसी भीड़ के बीच हरियाणा के सोनीपत से पहुंचे स्कूली कांवड़िए अपनी अनूठी पहल के कारण चर्चा में हैं।
हरियाणा के सर छोटूराम सीनियर स्कूल, रतनगढ़, सोनीपत के स्कूली बच्चों ने एक ऐसी प्राचीन परंपरा को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया है, जिसमें भगवान शिव के साथ-साथ गुरु को सर्वोच्च स्थान दिया जाता था। स्कूल के चेयरमैन जगदीश लोचब और प्रधानाचार्य एमएस आर्य के नेतृत्व में स्कूली बच्चे हरिद्वार के भूपतवाला स्थित श्री पंच अग्नि अखाड़े के स्वामी सुमितानंद ब्रह्मचारी के आश्रम पहुंचे। बच्चों के साथ उनके हैंडबॉल कोच नीतीश शर्मा भी मौजूद रहे।
आश्रम पहुंचने पर बच्चों ने श्री पंच अग्नि अखाड़े के स्वामी सुमितानंद ब्रह्मचारी से आशीर्वाद लिया। इसके बाद बच्चों ने विधि-विधान से मां गंगा की पूजा-अर्चना की और कांवड़ में गंगाजल लेकर सोनीपत के लिए प्रस्थान किया।
इन स्कूली बच्चों की कांवड़ इसलिए खास है, क्योंकि वे हरिद्वार से ले जा रहे गंगाजल से किसी शिवालय में जलाभिषेक नहीं करेंगे। बच्चे अपने स्कूल पहुंचकर अपने गुरुजनों का अभिषेक करेंगे।
बच्चों का मानना है कि गुरु के प्रति सम्मान की यह परंपरा भारतीय संस्कृति की प्राचीन परंपराओं में रही है। इसी परंपरा को दोबारा समाज के सामने लाने और नई पीढ़ी को गुरु के महत्व से परिचित कराने के उद्देश्य से उन्होंने यह पहल की है।
स्वामी सुमितानंद ब्रह्मचारी ने की बच्चों की सोच की सराहना
इस अवसर पर स्वामी सुमितानंद ब्रह्मचारी ने बच्चों को आशीर्वाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि गुरु और माता-पिता से बढ़कर संसार में कोई नहीं है। गुरु वह व्यक्ति है, जो मनुष्य को अज्ञान रूपी अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाता है।
उन्होंने बच्चों की इस सोच की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि गुरु के प्रति सम्मान और भारतीय संस्कारों को आगे बढ़ाने का संदेश भी है। उन्होंने बच्चों के माता-पिता को भी आशीर्वाद दिया और कहा कि उन्होंने अपने बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित किए हैं।
स्कूली बच्चे स्वयं हैंडबॉल के खिलाड़ी हैं और खेल के साथ-साथ भारतीय संस्कृति एवं गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति अपनी आस्था को भी आगे बढ़ा रहे हैं। इस अवसर पर बच्चों में हितेश स्वामी, लक्ष्य, अक्षय, वंश, आर्यावर्त, योगेश, आर्यन, दिपांशु, मोहीन, लक्ष्य शर्मा आदि मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

