- वनाग्नि नियंत्रण में उत्तराखंड के नवाचार बने मिसाल, वनाग्नि में देश में 14 वें स्थान पर उत्तराखंड : सुबोध उनियालराखंड : सुबोध उनियाल
- राज्य में 394 वनाग्नि घटनाओं से 331 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित - वीडियो बनाने के बजाय आग बुझाने में सहयोग की अपील
देहरादून, 25 मई (हि.स.)। उत्तराखंड के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि राज्य सरकार वनाग्नि रोकने के लिए नई रणनीतियों पर लगातार काम कर रही है। इसके तहत नियमित मैनपावर बढ़ाने के साथ व्यापक स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाए गए हैं। इस वर्ष अब तक 394 वनाग्नि घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनसे 331.12 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित वनाग्नि नियंत्रण के लिए किए जा रहे नवाचारों और जनसहभागिता आधारित प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।
वन मंत्री सुबोध उनियाल मंगलवार को यहां वन मुख्यालय के मंथन सभागार में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में वनाग्नि की घटनाएं मुख्य रूप से छह जनपदों, अल्मोड़ा, पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी, नैनीताल और पिथौरागढ़ में होती हैं। बावजूद राज्य देश में आगजनी की घटनाओं के मामले में 14वें स्थान पर है। मंत्री ने बताया कि विगत दस वर्षो में राज्य में वनाग्नि की घटनाएं 14638 और वन प्रभावित क्षेत्र 23682.77 हेक्टेयर,मानव मृत्यु 35 व मान्य घायल 76 रही। वर्ष 2026 में 394 वनाग्नि घटनाएं से 331.12 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुई और 01 मानव क्षति हुई।
सुबोध उनियाल ने मीडिया और आमजन से वनाग्नि को लेकर सनसनीखेज खबरों से बचने की अपील करते हुए कहा कि वीडियो बनाने के बजाय आग बुझाने में सहयोग करना अधिक आवश्यक है। सरकार का लक्ष्य रिस्पांस टाइम कम कर जनसहभागिता के माध्यम से वनाग्नि पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि शीतलाखेत मॉडल के आधार पर जड़धार मॉडल विकसित किया है। साथ ही वन पंचायतों, ग्राम स्तरीय समितियों और फायर वॉचरों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।
इस दौरान मंत्री ने बताया कि वर्ष 2020 के कोविड काल में राज्य में वनाग्नि की घटनाएं न्यूनतम स्तर पर दर्ज की गई थीं जिसका विभाग अध्ययन करेगा। इस वर्ष प्रदेशभर में 3500 से अधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए,जिनमें बड़ी संख्या में लोगों ने भागीदारी की। मुख्यमंत्री स्वयं वनाग्नि की मॉनिटरिंग कर अनूठी पहल किया।
वन मंत्री ने कहा कि चीड़ पिरूल संग्रहण को आजीविका मॉडल से जोड़कर स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार ने पिरूल संग्रहण पर 10 रुपये प्रति किलोग्राम की दर तय की है। राज्य में पिरूल आधारित नौ पैलेट और ब्रिकेट्स यूनिट संचालित हो रही हैं, जिससे वनाग्नि नियंत्रण में भी मदद मिल रही है। उन्होंने कहा कि विगत चार वर्षो में 13003.56 टन पिरूल एकत्रित किया गया। इस वर्ष के लिए 8555 टन का लक्ष्य लिया गया है।
सीसीएफ वनाग्नि आपदा नियंत्रक सुशांत पटनायक ने बताया कि प्रदेश में वनाग्नि नियंत्रण के लिए 1438 क्रू स्टेशन, 40 मास्टर कंट्रोल रूम, 174 वॉच टावर और आधुनिक संचार उपकरण सक्रिय किए गए हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के साथ विशेष वनाग्नि पूर्वानुमान के लिए समझौता भी किया गया है। सभी जिलों में मॉक ड्रिल और इंटर एजेंसी समन्वय बैठकों के जरिए आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। इस अवसर पर प्रमुख वन संरक्षक रंजन मिश्रा, एपीसीसीएफ कपिल लाल समेत विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

