उत्तराखंड के छह जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट, 102 सड़कें बंद, प्रमुख नदियों का जलस्तर खतरे से नीचे

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उत्तराखंड के छह जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट, 102 सड़कें बंद, प्रमुख नदियों का जलस्तर खतरे से नीचे


देहरादून, 21 अगस्त (हि.स.)। उत्तराखंड में मानसून सक्रिय बना हुआ है। मौसम विज्ञान केंद्र ने शुक्रवार को टिहरी, बागेश्वर, पिथौरागढ़, नैनीताल, चमोली और देहरादून में कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना जताते हुए येलो अलर्ट जारी किया है। राज्य के सभी जिलों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने और बारिश के तीव्र से अति तीव्र दौर की संभावना है।

मौसम विभाग के अनुसार, 22 अगस्त को देहरादून, टिहरी, चंपावत, पिथौरागढ़, बागेश्वर, नैनीताल, रुद्रप्रयाग, चमोली और पौड़ी में भारी बारिश हो सकती है। 23 अगस्त को देहरादून, टिहरी, पिथौरागढ़ और बागेश्वर तथा 24 अगस्त को देहरादून, नैनीताल और बागेश्वर में भारी वर्षा का पूर्वानुमान है। 21 से 25 अगस्त तक संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, चट्टान गिरने, सड़क एवं राजमार्ग बाधित होने, नदी-नालों के उफान पर आने और निचले क्षेत्रों में जलभराव की आशंका जताई गई है।

पिछले 24 घंटे में नाउकास्ट के माध्यम से चार ऑरेंज और 11 येलो अलर्ट जारी किए गए, जबकि रेड अलर्ट नहीं जारी किया गया। पिथौरागढ़ के तेजम में सर्वाधिक 104 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। बंगापानी में 96, धारचूला में 37.8, मुनस्यारी में 28.2, डीडीहाट में 20.8 और थल में 20 मिलीमीटर वर्षा हुई। विकासनगर में 60.5, नरेंद्रनगर में 57.5 और ऊखीमठ में 57 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।

बारिश के कारण राज्य में कई प्रमुख मार्ग प्रभावित हुए हैं। धारचूला-तवाघाट राष्ट्रीय राजमार्ग पर कूलागाड़ में पुल क्षतिग्रस्त होने से यातायात बंद है। तवाघाट-गुंजी राष्ट्रीय राजमार्ग भी 61वें किलोमीटर पर अवरुद्ध है। थल-मुनस्यारी राज्य मार्ग 164 और 166वें किलोमीटर पर बंद है। गर्जिया-बेतालघाट-खैरना-ओड़ाखाल-भटेरिया-मुक्तेश्वर राज्य मार्ग-62 भी 19वें किलोमीटर पर बाधित है। संबंधित विभागों की ओर से मार्ग खोलने का कार्य जारी है।

बारिश के चलते प्रदेश में विभिन्न श्रेणियों की कुल 102 सड़कें बंद हैं। चमोली में सबसे अधिक 23 और पौड़ी में 17 सड़कें बंद हैं। रुद्रप्रयाग में 14, पिथौरागढ़ में 13, टिहरी में 11, देहरादून में नौ और अल्मोड़ा में आठ सड़कें बंद हैं। बागेश्वर में चार, चंपावत में पांच, हरिद्वार में छह, नैनीताल में पांच, ऊधमसिंह नगर में एक और उत्तरकाशी में पांच सड़कें बंद हैं। बंद मार्गों में दो एनएच (बीआरओ), सात राज्य राजमार्ग और दो एमडीआर शामिल हैं।

केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश की प्रमुख नदियों का जलस्तर फिलहाल खतरे के निशान से नीचे है। हालांकि ऋषिकेश में गंगा और देवप्रयाग में भागीरथी का जलस्तर बढ़ने का रुझान है। शुक्रवार सुबह आठ बजे ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर 339.18 मीटर रहा, जबकि खतरे का निशान 340.50 मीटर है। हरिद्वार में गंगा 292.28 मीटर पर रही, जो खतरे के निशान 294 मीटर से नीचे है।

देवप्रयाग में भागीरथी का जलस्तर 461.20 मीटर रहा और इसमें बढ़ोतरी दर्ज की गई। रुद्रप्रयाग में अलकनंदा 625.40 मीटर तथा मंदाकिनी 624.44 मीटर पर रही। दोनों नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है और इनमें कमी का रुझान दर्ज हुआ है। धारचूला में काली नदी का जलस्तर 888.90 मीटर रहा और इसमें बढ़ोतरी हो रही है।

भीमगोड़ा बैराज, हरिद्वार से गंगा में 96,731 क्यूसेक तथा वीरभद्र बैराज, ऋषिकेश से 93,901.79 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया। कोसी बैराज, रामनगर से 4,384 क्यूसेक, गोला बैराज, हल्द्वानी से 2,053 क्यूसेक और यमुना के डाकपत्थर बैराज से 19,817 क्यूसेक डिस्चार्ज दर्ज हुआ।

प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बनाए रखने और लोगों से मौसम एवं सड़क की स्थिति को देखते हुए यात्रा करने की अपील की है। आकाशीय बिजली और गरज-चमक के दौरान लोगों को घरों के भीतर रहने, खिड़की-दरवाजे बंद रखने तथा पेड़ों के नीचे शरण नहीं लेने की सलाह दी गई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

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