कुंभ की तैयारी में निखरने लगी धर्मनगरी, धार्मिक चित्रकारी से सज रहीं फ्लाईओवर की दीवारें
हरिद्वार, 04 नवंबर (हि.स.)। कुंभ मेला-2027 की तैयारियों के बीच धर्मनगरी हरिद्वार की तस्वीर अब धीरे-धीरे बदलने लगी है। कुंभ मेले के बजट से पांच स्थायी पुल, 4.5 किलोमीटर लंबे गंगा घाट और कई सड़कों का निर्माण कराया जा रहा है। वहीं, शहर को भव्य और आकर्षक स्वरूप देने के लिए रंगाई-पुताई और सौंदर्यीकरण के कार्य भी तेजी से चल रहे हैं। प्राचीन इमारतों को एकरूप रंगों से सजाया जा रहा है, जबकि हाईवे के फ्लाईओवर और रेल अंडरपास की दीवारों पर सनातन संस्कृति से जुड़ी चित्रकारी की जा रही है।
सौंदर्यीकरण का उद्देश्य हरिद्वार पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को शहर की आध्यात्मिक पहचान, प्राचीन परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना है। हरकी पैड़ी समेत विभिन्न गंगा घाटों और कनखल क्षेत्र में विशेष रूप से काम कराया जा रहा है। कनखल की करीब 150 साल पुरानी इमारतों को एकरूप रंग-रूप देने के लिए पीले रंग से रंगाई-पुताई की जा रही है। वहीं, दुकानों और प्रतिष्ठानों के बोर्ड भी भगवा रंग में तैयार किए जा रहे हैं।
धार्मिक चित्रकारी से सजेगी हाईवे की दीवारें
हाईवे के प्रमुख फ्लाईओवर और रेल अंडरपास की दीवारों पर भी सौंदर्यीकरण का कार्य जारी है। यहां सनातन धर्म से जुड़े देवी-देवताओं, प्राचीन ऋषि-मुनियों और साधु-संतों के चित्र उकेरे जा रहे हैं। चित्रकारी के माध्यम से धार्मिक परंपराओं और भारतीय संस्कृति को प्रदर्शित करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि शहर में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को हरिद्वार की विशिष्ट पहचान का अहसास हो।
कनखल अपनी प्राचीन धार्मिक विरासत, मठों, मंदिरों और अखाड़ों के लिए विशेष पहचान रखता है। क्षेत्र की पुरानी इमारतें लंबे समय से इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा रही हैं। ऐसे में इन भवनों का सौंदर्यीकरण शहर के स्वरूप को निखारने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नवंबर के अंत तक पूरा होगा काम
अपर कुंभ मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती ने बुधवार काे बताया कि कुंभ मेले के मद्देनजर हरिद्वार को भव्य और आकर्षक स्वरूप देने की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। शहर की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को प्रमुखता देते हुए सौंदर्यीकरण कराया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि कनखल की पुरानी इमारतों को एकरूप रंगों से सजाने के साथ प्रमुख मार्गों और फ्लाईओवर पर धार्मिक चित्रकारी के माध्यम से सनातन संस्कृति को प्रदर्शित किया जा रहा है। एचआरडीए, एनएचएआई समेत कई विभागों को सौंदर्यीकरण के कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन कार्यों को नवंबर के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सौंदर्यीकरण के बाद शहर की बदलती तस्वीर को लेकर स्थानीय लोगों में भी उत्साह है।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

