सांखाल के ग्रामीणों ने की मिशाल पेश, बीमार महिला को कंडी डंडी से पहुंचाया अस्पताल

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सांखाल के ग्रामीणों ने की मिशाल पेश, बीमार महिला को कंडी डंडी से पहुंचाया अस्पताल


उत्तरकाशी, 28 फ़रवरी (हि.स.)। जनपद की पुरोला सांखाल के ग्रामीणों ने नई मिसाल पेश कर गंभीर रूप से बीमार महिला को करीब पांच किलोमीटर डंडी कंडी के सहारे सामुदायिक अस्पताल पहुंचाया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौगांव में प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने हायेयर सेंटर रेफर कर दिया।

गौरतलब है कि 21वीं सदी में जब 5और 6 जी के डिजीटल युग में भी इस गांव तक सड़क नहीं पहुंच पाई है और ग्रामीण आज भी बीमार मरीजों को कंधों व डंडी -कंडी पर उठाकर अस्पताल पहुंचाने को मजबूर हैं।

ताजा मामला सांखाल गांव की महिला इन्द्रि देवी, पत्नी स्वर्गीय बादरु का है, जिनकी अचानक तबीयत बिगड़ गई। आपात स्थिति में एम्बुलेंस या सड़क की सुविधा नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने मानवता की मिसाल तो पेश की, लेकिन व्यवस्था की बेरुखी भी उजागर हो गई। ग्रामीणों ने महिला को पैदल डंडी-कंडी के सहारे गांव से करीब पांच किलोमीटर नीचे घेडिया बैंड सड़क मार्ग तक पहुंचाया। वहां से निजी वाहन के माध्यम से बर्नीगाड लाया गया।

इसके बाद 108 एम्बुलेंस से मरीज को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौगांव पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने महिला की हालत गंभीर बताते हुए तत्काल दून अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। डॉ आर्य ने बताया कि महिला की हालत गंभीर थी जिसे हायर सेंटर रेफर कर दिया है।

यह केवल एक महिला की कहानी नहीं है, बल्कि पूरे सांखाल क्षेत्र की सच्चाई है। यहां आज भी सड़क, स्वास्थ्य सुविधा और त्वरित आपात सेवा ग्रामीणों के लिए सपना बनी हुई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब किसी गर्भवती महिला, बुजुर्ग या गंभीर मरीज को समय पर अस्पताल न मिल पाए, तो ऐसे विकास का क्या अर्थ है? सांखाल की ये तस्वीरें साफ बता रही हैं कि पहाड़ के दूरस्थ गांवों में न सड़क पहुंची है और न ही भरोसेमंद स्वास्थ्य व्यवस्था।

हिन्दुस्थान समाचार / चिरंजीव सेमवाल

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