अमेरिकन आश्रम की संपत्ति पर एसआईटी जांच की मांग

WhatsApp Channel Join Now
अमेरिकन आश्रम की संपत्ति पर एसआईटी जांच की मांग


हरिद्वार, 18 अगस्त (हि.स.)। भूपतवाला की रानीगली स्थित अमेरिकन आश्रम, स्वामी देवानंद ट्रस्ट की संपत्ति को लेकर अब जांच की मांग तेज हो गई है। वार्ड संख्या-2 की पार्षद सुनीता शर्मा ने जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और एसएसपी हरिद्वार को शिकायत देकर मामले की उच्चस्तरीय जांच अथवा एसआईटी जांच कराने की मांग की है। शिकायत में ट्रस्ट की जमीन के कथित हस्तांतरण, कब्जे, निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों के साथ-साथ संपत्ति से जुड़े आर्थिक लेनदेन की भी पड़ताल कराने की मांग उठाई गई है। पार्षद ने प्रशासन से साफ तौर पर कहा है कि जांच पूरी होने तक आश्रम की संपत्ति में किसी भी प्रकार की बिक्री, हस्तांतरण, नया निर्माण या स्वरूप परिवर्तन पर रोक लगाई जाए, ताकि जांच के दौरान संपत्ति की स्थिति न बदले और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका न रहे।

छह मांगों के जरिए प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव

पार्षद की शिकायत में छह प्रमुख मांगें रखी गई हैं। इनमें सबसे पहली मांग पूरे मामले की उच्चस्तरीय या एसआईटी जांच की है। इसके साथ ही यदि ट्रस्ट की संपत्ति का कोई बिक्री या हस्तांतरण नियमविरुद्ध पाया जाता है तो उसे निरस्त कराने और संपत्ति को नियमानुसार संरक्षण में लेने की मांग की गई है।

शिकायत में दोषी पाए जाने वाले ट्रस्ट पदाधिकारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग भी की गई है। वहीं संपत्ति पर हुए कथित अवैध निर्माण की जांच कर उसे तत्काल रोकने की मांग उठाई गई है।

जमीन के साथ बैंक खातों की भी हो जांच

मामले को केवल जमीन के विवाद तक सीमित न रखते हुए पार्षद ने संपत्ति से जुड़े बैंक खातों और आर्थिक लेनदेन की फोरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि आश्रम की जमीन के दस्तावेज, रजिस्ट्री, हस्तांतरण पत्र, राजस्व रिकॉर्ड और संबंधित बैंक खातों की जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि संपत्ति के संबंध में किस स्तर पर क्या लेनदेन हुआ और उसमें किन लोगों की भूमिका रही।

करीब तीन बीघा जमीन पर उठाए सवाल

शिकायत में आश्रम की करीब तीन बीघा भूमि को कथित तौर पर खुर्द-बुर्द किए जाने और उसके कुछ हिस्से की बिक्री का आरोप लगाया गया है। पार्षद ने इस भूमि के स्वामित्व और हस्तांतरण से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच की मांग की है। साथ ही यह भी पता लगाने की मांग की गई है कि यदि भूमि का कोई हिस्सा बेचा या हस्तांतरित किया गया है तो उसके लिए आवश्यक वैधानिक अनुमति ली गई थी या नहीं। हालांकि, जमीन की बिक्री, कथित कब्जे और अन्य आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इन आरोपों की वास्तविकता जांच और संबंधित दस्तावेज सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

धार्मिक संपत्ति के व्यावसायिक इस्तेमाल पर सवाल

पार्षद ने शिकायत में आरोप लगाया है कि जिस संपत्ति पर पहले भंडारा, निशुल्क दवा वितरण और धर्मशाला जैसी गतिविधियां संचालित होने की बात कही जाती है, वहां अब दुकानों, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। इसी को लेकर प्रशासन से यह भी जांच करने की मांग की गई है कि वर्तमान में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों के लिए संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमति ली गई है या नहीं और इन गतिविधियों का ट्रस्ट की मूल प्रकृति एवं संपत्ति के उपयोग से क्या संबंध है।

कांवड़ मार्ग को लेकर भी उठाई आपत्ति

शिकायत में आश्रम के आसपास कथित कब्जे और निर्माण से कांवड़ मार्ग प्रभावित होने का मुद्दा भी उठाया गया है। पार्षद ने प्रशासन से मौके का निरीक्षण कराने और यदि कोई निर्माण या कब्जा नियमों के विपरीत पाया जाता है तो तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

अब प्रशासन के फैसले का इंतजार

अमेरिकन आश्रम की संपत्ति को लेकर आई शिकायत ने अब प्रशासन के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या ट्रस्ट की जमीन का नियम विरुद्ध हस्तांतरण हुआ? क्या करीब तीन बीघा भूमि की बिक्री वैध तरीके से हुई? वर्तमान व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति किस आधार पर है? और संपत्ति से जुड़े आर्थिक लेनदेन में कौन-कौन लोग शामिल रहे? इन सभी सवालों का जवाब अब प्रशासनिक जांच से ही सामने आएगा। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों को आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए, जब तक सक्षम जांच एजेंसी अथवा प्रशासन द्वारा इनकी पुष्टि नहीं कर दी जाती।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

Share this story