देहरादून में 'द अनबिकमिंग' पर साहित्यिक चर्चा

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देहरादून में 'द अनबिकमिंग' पर साहित्यिक चर्चा


देहरादून, 08 जुलाई (हि. स.)। लेखक एवं अधिवक्ता कार्तिकेय वाजपेयी की पुस्तक 'द अनबिकमिंग : लेट लाइफ़ रिवील इट्स पर्पज़' पर बुधवार को शहर के एक होटल में आयोजित साहित्यिक संवाद में आधुनिक जीवन, पहचान, सफलता और जीवन के उद्देश्य जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।

'वैली ऑफ वर्ड्स' अंतरराष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ पुस्तक के औपचारिक लोकार्पण के साथ हुआ। इसके बाद 'वैली ऑफ वर्ड्स' के फेस्टिवल डायरेक्टर डॉ. संजीव चोपड़ा और वाजपेयी के बीच आत्मबोध, महत्वाकांक्षा, सामाजिक अपेक्षाओं तथा व्यक्ति की पहचान पर केंद्रित संवाद हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ पुस्तक के औपचारिक लोकार्पण के साथ हुआ। इस अवसर पर कार्तिकेय वाजपेयी, डॉ. संजीव चोपड़ा, सतीश शर्मा और रश्मि चोपड़ा मंच पर उपस्थित रहे। इसके बाद 'वैली ऑफ वर्ड्स' के फेस्टिवल डायरेक्टर डॉ. संजीव चोपड़ा और लेखक कार्तिकेय वाजपेयी के बीच आधुनिक जीवन और आत्मबोध पर केंद्रित एक वैचारिक संवाद हुआ, जिसमें पहचान, महत्वाकांक्षा, भय, और जीवन के वास्तविक उद्देश्य जैसे विषयों पर गंभीर चर्चा हुई।

वाजपेयी ने कहा कि आज की प्रतिस्पर्धी दुनिया में व्यक्ति लगातार अधिक हासिल करने की दौड़ में लगा है, लेकिन इस प्रक्रिया में वह स्वयं से जुड़े मूल प्रश्न पूछना भूल जाता है। उन्होंने कहा कि उनकी पुस्तक उत्तर देने के बजाय पाठकों को आत्मचिंतन और स्वयं से कठिन प्रश्न पूछने के लिए प्रेरित करती है।

श्री चोपड़ा ने कहा कि साहित्य का उद्देश्य केवल कहानी कहना नहीं, बल्कि पाठकों के भीतर नए विचारों के द्वार खोलना भी है। उनके अनुसार, 'द अनबिकमिंग' ऐसी कृति है, जो आसान उत्तर देने के बजाय कठिन प्रश्न उठाने का साहस करती है और यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।

उन्होंने बताया कि पुस्तक की भूमिका (फोरवर्ड) दलाई लामा और स्वामी सर्वप्रियानंद ने लिखी है, जिससे इसे आध्यात्मिक और दार्शनिक दृष्टि भी प्राप्त होती है।

उपन्यास के केंद्रीय पात्र सिद्धार्थ और उनके गुरु अजय की कहानी के माध्यम से पहचान, भय, महत्वाकांक्षा, रिश्तों, अपेक्षाओं और आत्मस्वीकृति जैसे विषयों को उभारा गया है। कथा आधुनिक जीवन में आत्मबोध और जीवन के उद्देश्य की खोज को केंद्र में रखती है।

आयोजकों के अनुसार, पुस्तक में दलाई लामा और स्वामी सर्वप्रियानंद की भूमिका (फोरवर्ड) शामिल है। उपन्यास के माध्यम से पहचान, भय, महत्वाकांक्षा, रिश्ते और आत्मस्वीकृति जैसे विषयों को प्रस्तुत किया गया है।

कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर और पुस्तक हस्ताक्षर सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में पाठकों ने भाग लिया।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

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