ट्राउट पालन से बलवीर ने संवारी आजीविका, 15 क्विंटल उत्पादन से छह लाख रुपये का मुनाफा
रूद्रप्रयाग, 22 अगस्त (हि.स.)। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के जगैड़ बस्ती गांव निवासी बलवीर सिंह राणा ट्राउट मछली पालन को स्वरोजगार का जरिया बनाकर सफलता की नई कहानी लिख रहे हैं। पहाड़ी क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए उन्होंने ट्राउट पालन को अपनी आजीविका का मजबूत आधार बनाया है। मत्स्य विभाग से मिले तकनीकी सहयोग और मार्गदर्शन से उन्होंने इस व्यवसाय को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया।
बलवीर सिंह राणा ने बताया कि वर्तमान सीजन में उन्होंने करीब 15 क्विंटल ट्राउट मछली का उत्पादन किया। उत्पादित मछली की बिक्री के लिए उन्हें बाजार के साथ-साथ संस्थागत खरीदार भी उपलब्ध हुए। उनके द्वारा उत्पादित ट्राउट मछली में से 8 क्विंटल मछली भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) द्वारा खरीदी गई, जबकि शेष मछली को उन्होंने स्थानीय बाजार में अच्छे दामों पर विक्रय किया।
उन्होंने बताया कि ट्राउट मछली की अच्छी मांग होने के कारण उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हुआ। इससे उनका मत्स्य पालन व्यवसाय लाभकारी साबित हो रहा है। बलवीर सिंह के अनुसार, इस सीजन में उन्हें करीब 6 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ है। उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन को व्यवसाय के रूप में अपनाने से उन्हें अपने गांव में ही स्वरोजगार का अवसर मिला है और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में भी मदद मिली है।
राणा ने बताया कि मत्स्य पालन शुरू करने और इसे व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने में मत्स्य विभाग का महत्वपूर्ण सहयोग मिला। विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा उन्हें ट्राउट पालन की तकनीक, देखभाल, उत्पादन और विपणन से संबंधित आवश्यक जानकारी दी गई। विभाग के मार्गदर्शन से उन्हें मत्स्य पालन के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास मिला।
उन्होंने कहा कि पहाड़ों में रोजगार के सीमित अवसरों को देखते हुए मत्स्य पालन ग्रामीण युवाओं और किसानों के लिए स्वरोजगार का बेहतर माध्यम बन सकता है। यदि ग्रामीण उपलब्ध संसाधनों का उचित उपयोग करते हुए वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन करें, तो इससे अच्छी आमदनी अर्जित की जा सकती है।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल

