गुरुकुल कांगड़ी में 200 आर्य वीरों का उपनयन संस्कार
हरिद्वार, 12 जुलाई (हि.स.)। गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय में आर्य वीर दल एवं आर्या वीरांगना दल के उत्तर भारत के विभिन्न जनपदों और शिक्षण संस्थानों से आए प्रतिभागियों के लिए आयोजित आवासीय प्रशिक्षण शिविर के छठें दिन रविवार को उपनयन संस्कार, वैदिक यज्ञ, बौद्धिक सत्र और शारीरिक प्रशिक्षण के माध्यम से युवाओं को आदर्श नागरिक बनने की प्रेरणा दी गई।
शिविर के दौरान 200 आर्य वीरों का उपनयन संस्कार पांच कुण्डीय वैदिक यज्ञ के माध्यम से विधि-विधान के साथ सम्पन्न कराया गया। यह संस्कार वैदिक विद्वान प्रो. सत्यदेव निगमालंकार के मार्गदर्शन में हुआ। अपने दीक्षा उपदेश में उन्होंने उपनयन संस्कार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सत्य, सदाचार, सेवा, संयम और राष्ट्रभक्ति जैसे जीवन मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सुदृढ़ चरित्र ही वास्तविक शिक्षा का आधार है और चरित्रवान व्यक्ति ही समाज व राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उपनयन संस्कार के बाद सभी आर्य वीरों व वीरांगनाओं ने नशा एवं दुर्व्यसनों से दूर रहने, शाकाहारी एवं सात्विक जीवनशैली अपनाने तथा समाज सेवा का संकल्प लिया।
मुख्य वक्ता डॉ. नरेन्द्र आर्य ने बौद्धिक सत्र में कहा कि केवल धन या शिक्षा प्राप्त कर लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि चरित्र ही व्यक्ति को सही दिशा और स्थायी सफलता प्रदान करता है। चरित्रवान व्यक्ति के चेहरे पर तेज, मन में दृढ़ संकल्प और आत्मा में परम आनंद होता है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. संदीप वेदालंकार, डॉ. अंकित कुमार और डॉ. मनोज कुमार ने किया। इस अवसर पर प्रो. नितिन काम्बोज, डॉ. आशीष धमान्दा, डॉ. भारत वेदालंकार, डॉ. कपिल देव शास्त्री, डॉ. बबीता शर्मा, डॉ. दीपिका, डॉ. शिवकुमार चौहान, कुलभूषण शर्मा और हेमन्त सिंह नेगी सहित अनेक शिक्षाविद एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

