चार साल बाद टूटा गतिरोध, कई शहरों तक बढ़ा टिहरी लेक फेस्टिवल का दायरा

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टिहरी, 06 मार्च (हि. स.)। इस बार आयोजित हो रहा टिहरी लेक फेस्टिवल कई मायनों में खास है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि चार वर्षों से चला आ रहा गतिरोध अब टूट गया है। कोविड-19 महामारी के कारण वर्ष 2021 के बाद इस आयोजन का संचालन नहीं हो पाया था, लेकिन राज्य सरकार की पहल के बाद इस वर्ष फिर से इसका आयोजन शुरू किया गया है।

इस बार फेस्टिवल की मेजबानी केवल टिहरी शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा जिले के कई अन्य क्षेत्रों तक भी बढ़ा दिया गया है। पहली बार नरेंद्र नगर, प्रतापनगर, धनौल्टी और देवप्रयाग जैसे स्थान भी टिहरी लेक फेस्टिवल की मेजबानी कर रहे हैं।

दरअसल, राज्य सरकार बड़े आयोजनों को किसी एक स्थान पर केंद्रित करने के बजाय विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित करने की नीति पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य यह है कि अधिक से अधिक क्षेत्रों को बड़े आयोजनों से जुड़ने का अवसर मिले और पर्यटन को व्यापक स्तर पर बढ़ावा मिल सके। राष्ट्रीय खेलों के आयोजन में भी यही मॉडल अपनाया गया था, जिसमें देहरादून के साथ-साथ हरिद्वार, हल्द्वानी, रुद्रपुर, टिहरी और पिथौरागढ़ जैसे शहरों को भी शामिल किया गया था।

टिहरी लेक फेस्टिवल के इतिहास में यह पहली बार है जब देवप्रयाग, नरेंद्रनगर, प्रतापनगर, धनोल्टी और घनसाली जैसे क्षेत्रों को इस आयोजन से जोड़ा गया है। इन स्थानों पर ट्रैकिंग इवेंट के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी विशेष आयोजन किया जा रहा है। इस तरह इस बार केवल टिहरी शहर ही नहीं, बल्कि पूरा टिहरी जिला फेस्टिवल की मेजबानी कर रहा है।

जिलाधिकारी निकिता खंडेलवाल ने कहा कि टिहरी जिले के कई क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत संभावनाशील हैं और उन्हें और अधिक पहचान दिलाने की आवश्यकता है। टिहरी लेक फेस्टिवल में अधिक से अधिक क्षेत्रों की भागीदारी से पर्यटन को नई दिशा मिलेगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि टिहरी उत्तराखंड का ऐसा जिला है जिसमें पर्यटन की व्यापक संभावनाएं हैं। टिहरी लेक का आकर्षण देश-विदेश के पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है। सरकार यहां पर्यटन सुविधाओं का लगातार विस्तार कर रही है, ताकि टिहरी वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर सके।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

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