साध्वी सुदेश मुनि उदासीन ब्रह्मलीन, संत समाज ने दी श्रद्धांजलि
हरिद्वार, 26 अक्टूबर (हि.स.)। कनखल स्थित अवधूत जगतराम उदासीन आश्रम की साध्वी सुदेश मुनि उदासीन (65) के ब्रह्मलीन होने पर संत समाज और श्रद्धालुओं ने गहरा शोक व्यक्त किया। उनके ब्रह्मलीन होने की सूचना मिलते ही संत-महात्मा और श्रद्धालु आश्रम पहुंचे और उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके बाद पूरे विधि-विधान के साथ कनखल श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।
इस अवसर पर आश्रम संचालक स्वामी सुतीक्ष्ण मुनि और संत जगजीत सिंह शास्त्री ने कहा कि साध्वी सुदेश मुनि उदासीन पिछले करीब 40 वर्षों से आश्रम से जुड़ी हुई थीं। धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन और जनसेवा के कार्यों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके सेवा भाव और धार्मिक गतिविधियों के चलते स्थानीय लोगों व दूर-दराज के श्रद्धालुओं में भी उनके प्रति गहरी आस्था थी।
युवा भारत साधु समाज के महामंत्री स्वामी रवि देव शास्त्री और नया उदासीन अखाड़ा के कोठारी महंत नितिन दास ने कहा कि संतों का जीवन सेवा, साधना और धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित होता है। ब्रह्मलीन साध्वी सुदेश मुनि ने सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में योगदान दिया। उनके सेवा कार्यों और योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। उनके ब्रह्मलीन होने से संत समाज और अनुयायियों में शोक है।
इस दौरान बहन स्नेहलता पाठक, महामंडलेश्वर स्वामी कपिल मुनि, स्वामी नामदेव मुनि, महंत सत्यप्रकाश, महंत गंगादास, स्वामी हरिहरानंद, बाबा मोहन सिंह, बाबा तीरथ सिंह, साध्वी सुखजीत सरस्वती, साध्वी तृप्ता सरस्वती, स्वामी कैलाश मुनि सहित अनेक संत और श्रद्धालु उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

