महिला आरक्षण विधेयक राजनीतिक षड्यंत्र: यशपाल आर्य

WhatsApp Channel Join Now
महिला आरक्षण विधेयक राजनीतिक षड्यंत्र: यशपाल आर्य


देहरादून, 28 अप्रैल (हि.स.)। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने राज्य विधानसभा में 'नारी सम्मान–लोकतंत्र में अधिकार’ विषय पर चल रहे विशेष सत्र में महिला आरक्षण और महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर सत्ता पक्ष को घेरा। उन्हाेंने महिला सशक्तिकरण के नाम पर लाए गए महिला आरक्षण विधेयक को एक 'षड्यंत्र' बताया है।

विधानसभा के विशेष सत्र में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि राज्य की भौगोलिक परिस्थितियां अलग हैं और केवल सीटों की संख्या बढ़ाने के बजाय महिलाओं को वास्तविक अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेस हमेशा महिलाओं की पक्षधर रही है और पंचायत स्तर को मजबूत करने का कार्य किया है। उन्होंने मांग की कि लोकसभा की 543 सीटों पर 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू किया जाए और उत्तराखंड में इसे वर्ष 2027 तक प्रभावी बनाया जाए।

उन्होंने कांग्रेस सरकारों के समय में लाए गए आधार, सूचना का अधिकार, शिक्षा और मनरेगा जैसे कानूनों का भी उल्लेख किया। साथ ही अंकिता भंडारी प्रकरण उठाते हुए कहा कि आज भी महिलाओं की सुरक्षा और न्याय का सवाल बना हुआ है। आर्य ने पहाड़ी क्षेत्रों में महिलाओं की स्थिति, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति और जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य पर चिंता जताई। उन्होंने सुझाव दिया कि 2023 के महिला आरक्षण विधेयक को आधार बनाकर 2029 तक इसे लागू किया जाए।

भाजपा विधायक बिनोद चमोली ने कहा कि समय-समय पर जनगणना हुई, लेकिन सीटों की संख्या नहीं बढ़ाई गई। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए परिसीमन आवश्यक है और वर्तमान में एक सांसद पर अत्यधिक जनसंख्या का भार है।

उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह मूल मुद्दों से ध्यान भटका रहा है और राजनीतिक जमीन तलाश रहा है। इस पर कांग्रेस विधायकों ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा ही अपनी जमीन खो रही है।

बहस के दौरान दोनों पक्षों के बीच कई बार तीखी नोकझोंक हुई। महिला सम्मान और आरक्षण को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

Share this story