सोमवती अमावस्या पर में उमड़ा आस्था का जनसैलाब

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सोमवती अमावस्या पर में उमड़ा आस्था का जनसैलाब


हरिद्वार, 15 जून (हि.स.)। सोमवती अमावस्या पर धर्मनगरी हरिद्वार में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। तड़के सुबह से ही हर की पैड़ी, ब्रह्मकुंड, मालवीय घाट, सुभाष घाट और कुशा घाट सहित प्रमुख गंगा घाटों पर लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया।

देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से आए श्रद्धालुओं की मौजूदगी से पूरे शहर में भक्ति और श्रद्धा का माहौल बना रहा। भोर सुबह से आरम्भ हुआ स्नान का सिलसिला दिन भर अनवरत जारी रहा।

अमावस्या पर्व होने के कारण तीर्थनगरी के आश्रम-अखाड़ों में भी धार्मिक आयोजन हुए। अधिक मास का आज समापन होने के कारण भी विशेष आयोजन हुए। इसी के साथ विगत एक माह से तीर्थनगरी के विभिन्न क्षेत्रों में चल रही भागवत व अन्य कथाओं को विश्राम मिला।

सोमवती अमावस्या स्नान पर्व का सनातन धर्म में विशेष महत्व बताया गया है। अधिक मास के अंत में सोमवती अमावस्या होने का महत्व और अधिक हो जाता है। सोमवती अमावस्या को गंगा और अन्य पवित्र नदियों में स्नान का विशेष पुण्य बताया गया है। यही कारण रहा कि सोमवती अमावस्या स्नान से दो दिन पूर्व तीर्थनगरी में लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। तीन दिन से भीड़ के कारण तीर्थनगरी पूरी तरह से पैक रही।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और समूची तीर्थनगरी में जाम के कारण लोग हलकान रहे। सबसे अधिक समस्या स्थानीय लोगों को उठानी पड़ी, जो भीड़ और जाम के कारण घरों में कैद रहने को मजबूर रहे।

भारी भीड़ को देखते हुए स्नान पर्व लिए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। डीएम मयूर दीक्षित व एसएसपी नवनीत सिंह ने विभिन्न घाटों और संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। अधिकारियों को भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के निर्देश दिए गए।

प्रशासन ने मेला क्षेत्र को विभिन्न सेक्टरों में विभाजित कर प्रत्येक सेक्टर में नोडल अधिकारी और सेक्टर मजिस्ट्रेट तैनात किए। सभी अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार भ्रमणशील रहकर स्थिति पर नजर रखने और किसी भी स्थान पर अत्यधिक भीड़ एकत्रित न होने देने के निर्देश दिए गए।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा के मद्देनजर पूरे मेला क्षेत्र में व्यापक पुलिस बल तैनात किया गया। सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन और कंट्रोल रूम के माध्यम से लगातार निगरानी की गई। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, फायर ब्रिगेड, मेडिकल टीम और एम्बुलेंस सेवाओं को अलर्ट मोड पर रखा गया। घाटों पर बैरिकेडिंग, सार्वजनिक घोषणा प्रणाली और दिशा-निर्देशों के माध्यम से श्रद्धालुओं को लगातार मार्गदर्शन दिया जाता रहा। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया गया।

यातायात प्लान लागू होने के बाद भी भीड़ के समक्ष प्रशासन के सारे इंतजाम धड़ाम रहे। जाम के कारण लोगों को समस्याओं से दो-चार होना पड़ा। अमावस्या पर लोगों ने अपने पितरों की मोक्ष की कामना से नारायणी शिला व कुशावर्त घाट पर पिण्डदान, नारायण बलि आदि कर्म करवाकर पितरों के मोक्ष की कामना की।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

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