महापुरुषों के विचारों को कार्यरूप में बदलता है भारत : डालचंद
हरिद्वार, 11 जनवरी (हि.स.)। भारत दुनिया का ऐसा देश है, जहां महापुरुषों के विचारों को सुनकर उन्हें कार्यरूप में परिणत भी किया जाता है। यही कारण था कि रूस के क्रांतिकारी लेनिन ने अपनी बेटी को भारत की गंगानगरी हरिद्वार भेजा था। यह बात बनवासी कल्याण आश्रम के क्षेत्रीय संगठन मंत्री डालचंद ने कही। वह यहां शिवालिक नगर में विवेकानंद विचार मंच द्वारा आयोजित समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा स्वामी विवेकानंद के 'नर सेवा, नारायण सेवा' के ध्येय वाक्य पर अमल करते हुए विवेकानंद विचार मंच हर वर्ष हरिद्वार से एक वर्ष की खाद्य सामग्री वनवासी कल्याण आश्रम, रुद्रपुर को भेजता आ रहा है।
स्वामी विवेकानंद साहित्य पर शोधकर्ता डाॅ० राधिका नागरथ ने पाश्चात्य संस्कृति की चमक-धमक की तुलना धर्मनगरी हरिद्वार के आध्यात्मिक वातावरण से करते हुए स्वामी जी के संस्मरण प्रस्तुत किये। बलवीर तलवार ने 'भूर्भुवः स्वह की व्याख्या के माध्यम से विवेकानन्द के विचारों को समझाया। चेतना पथ के सम्पादक अरुण कुमार पाठक ने बताया, कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस दशक को न केवल उत्तराखण्ड बल्कि, युवाओं का दशक घोषित किया है, अतः अधिक से अधिक युवाओं को विवेकानन्द जी के सेवा प्रकल्पों से जोड़ कर प्रेरित किया जाना चाहिये।
इस अवसर पर सचिव शशी पाल भनोट ने संस्था का परिचय तथा उसके विभिन्न प्रकल्पों की जानकारी दी। डाॅ० नीता नय्यर 'निष्ठा' ने आगन्तुकों से वैश्विक प्रार्थना का वाचन कराया। धन्यवाद ज्ञापन अध्यक्ष अविनाश कुमार गुप्ता ने किया। मंच संचालन वरिष्ठ हिन्दी प्रेमी डाॅ० नरेश मोहन के द्वारा किया गया।
इस अवसर पर वनवासी कल्याण आश्रम के क्षेत्रीय संगठन मंत्री डाल चंद को विवेकानन्द विचार मंच की ओर से सहायता सामग्री का एक पैकेट सांकेतिक रूप में बीएचईएल के उप नगरी प्रशासक संजय पंवार ने भेंट किया। रुद्रपुर के वनवासी कल्याण आश्रम को सहायता साम्रगी कुछ ही दिनों में रवाना की जायेगी। इस अवसर पर प्रमुख रूप से शिवालिक नगर पालिका सभासद अशोक मेहता, वरिष्ठ पत्रकार सुनील दत्त पांडे, संस्था सचिव संजीव गुप्ता, जगदीश चंद्र क्वात्रा, डॉ बीएस कुशवाहा, मुकेश तायल, सरदार रणजीत सिंह, विरेन्द्र अग्रवाल, अनिल रस्तोगी, देवेश कुमार वशिष्ठ, सुभाष चाँदना, अंबरीश आदि उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

