चरित्र निर्माण की प्रयोगशाला शांतिकुंज की बाल संस्कारशाला: शैफाली पण्ड्या

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चरित्र निर्माण की प्रयोगशाला शांतिकुंज की बाल संस्कारशाला: शैफाली पण्ड्या


हरिद्वार, 09 मई (हि.स.)। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदी के मार्गदर्शन में संचालित बाल संस्कारशाला बच्चों के सर्वांगीण विकास एवं संस्कार निर्माण की दिशा में निरंतर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यहाँ नौनिहालों को शिक्षा के साथ-साथ नैतिकता, अनुशासन, संस्कृति, सेवा एवं सद्भाव जैसे जीवनोपयोगी मूल्यों का प्रशिक्षण दिया जाता है।

इसी कड़ी में बाल संस्कारशाला विभाग द्वारा सांस्कृतिक संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें बच्चों ने अपनी आकर्षक प्रस्तुतियों के साथ संस्कृति एवं संस्कारों से सभी का मन मोह लिया।

इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ महिला मंडल प्रमुख श्रीमती शैफाली पंड्या द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर बाल संस्कारशाला के बच्चों ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर अतिथियों का अभिनंदन किया।

इस अवसर पर शैफाली पण्ड्या ने कहा कि शांतिकुंज की बाल संस्कारशाला केवल बच्चों की प्रतिभा निखारने का केंद्र नहीं, बल्कि श्रेष्ठ चरित्र निर्माण की प्रयोगशाला है। यहाँ बच्चों में संस्कार, संवेदनशीलता और सकारात्मक जीवन दृष्टि का विकास किया जाता है, जिससे वे भविष्य में आदर्श नागरिक बन सकें। गायत्री विद्यापीठ की व्यवस्था मण्डल प्रमुख श्रीमती पण्ड्या ने कहा कि बाल्यकाल में दिए गए संस्कार व्यक्ति के सम्पूर्ण जीवन की दिशा निर्धारित करते हैं। यदि बच्चों को प्रारम्भ से ही नैतिक मूल्यों एवं भारतीय संस्कृति से जोड़ा जाए, तो वे समाज और राष्ट्र के लिए प्रेरणास्रोत बन सकते हैं।

व्यवस्थापक योगेन्द्र गिरि ने कहा कि शांतिकुंज का उद्देश्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि ऐसी पीढ़ी तैयार करना है, जो मानवीय मूल्यों से संपन्न होकर समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाए। सांस्कृतिक संध्या में बच्चों ने मातृ वंदना, एक्शन सॉन्ग, गरबा नृत्य, योगासन एवं अन्य प्रेरणाप्रद सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति और संस्कारों की सुंदर झलक प्रस्तुत की। बच्चों की अनुशासित, आत्मविश्वासपूर्ण एवं भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम में अभिभावकों एवं उपस्थित श्रद्धालुओं ने बच्चों की प्रतिभा की मुक्तकंठ से सराहना की।

कार्यक्रम के अंत में महिला मंडल की वरिष्ठ बहनों एवं परिजनों ने बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाएं व्यक्त की। इस अवसर पर विभिन्न प्रांतों से आये साधकों, शिविरार्थियों के बच्चों सहित भारती नागर, श्वेता पटेल, सुमन शाही आदि प्रशिक्षक बहिनें उपस्थित रहीं।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

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