जूना अखाड़े के चार महंतों के स्वामी प्रबोधानंद ने की पंक्ति पत्तल वहिष्कार की घोषणा

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हरिद्वार, 15 मार्च (हि.स.)। हिंदू रक्षा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं भारत साधु समाज के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री महामंडलेश्वर प्रबोधानंद गिरि महाराज ने प्रेस क्लब में पत्रकारों से वार्ता कर जूना अखाड़े पर कई गंभीर आरोप लगाए।

उन्होंने अखाड़े के चारों महंतों के पंक्ति पत्तल बृहिष्कार किए जाने का ऐलान किया। इसके साथ ही अखाड़े के चारों श्रीमहंतों पर उन्होंने अखाड़े और सनातन परम्परा को नष्ट करने का आरोप लगाया। कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें पता चला कि 30 नवंबर को जूना अखाड़े ने एक पत्र जारी कर उन्हें और उनके गुरु को अखाड़े से निष्कासित कर दिया था। उसके बाद बिचौलिए के माध्यम से समझौता कराने का दबाव बनाया।

उन्होंने बताया कि निष्कासन के आरोपों का जवाब एक करोड़ की मानहानि के साथ अधिवक्ता के माध्यम से अखाड़े के पदाधिकारियों को भेजा गया था, लेकिन अब तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने कहा कि विभिन्न लोगों द्वारा उन्हें शांत रहने की सलाह दी गई थी, इसलिए पत्रकार वार्ता करने में विलंब हुआ।

उन्होंने कहा कि अखाड़े द्वारा लगाए गए सभी आरोप झूठे, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण हैं। उनका कहना है कि उन्होंने कभी जूना अखाड़े में नागा दीक्षा नहीं ली और न ही उसकी सदस्यता प्राप्त की। वर्ष 2007 में प्रयागराज में संतों द्वारा उन्हें महामंडलेश्वर के रूप में सम्मानित किया गया था। इस कारण से उन्हें जूना अखाड़े से निष्कासन का कोई अधिकार ही नहीं है।

स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने बताया कि वर्ष 2021 में जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज द्वारा उनका अभिषेक किया गया था और इस प्रक्रिया को किसी अन्य पदाधिकारी द्वारा निरस्त नहीं किया जा सकता।

उन्होंने आरोप लगाया कि अखाड़े ने उनसे प्राप्त लाखों रुपये की धनराशि ली, जिसका उपयोग नशा आदि कार्यों में उपयोग किया गया। अखाड़े को ससम्मान वह राशि उन्हें लौटा देनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है तो वह अब न्यायाल का दरवाजा खटखटाएंगे।

पत्रकार वार्ता में उन्होंने जूना अखाड़े के हरि गिरी, मोहन भारती, प्रेम गिरी और नारायण गिरी पर आरोप लगाते हुए उनका पंक्ति पत्तल वहिष्कार किए जाने की उन्होंने घोषणा की। उन्होंने कहा कि वह इन चारों को अपने यहां पंक्ति में नहीं बुलाएंगे और न ही उनके यहां जाएंगे।

स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने आरोप लगाया कि अखाड़े में अनैतिक गतिविधियों और नशे से जुड़े कार्यों के लिए महामंडलेश्वरों से अवैध रूप से धन मांगा जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि कुंभ मेले में कुछ लोगों को अस्थायी रूप से नागा साधु बनाकर प्रस्तुत किया जाता है, जिसका उन्होंने विरोध किया। फर्जी नागा के रूप में उन्होंने अपनी की संस्था हिन्दू रक्षा सेना के लोगों को पकड़ा। उन्होंने कहाकि हरि गिरी, मोहन भारती, प्रेम गिरी और नारायण गिरी ने अखाड़े में गंदगी को संरक्षण दिया हुआ है।

इन्होंने जूना अखाड़े को व्यापार, उगाही, पारिवार को पोषण करने वाला बताया। कहाकि अखाड़े के पैसे से हरिगिरि ने सुअर पालन भी खोला हुआ है। इसका परिवार भी सुअर पालन में लिप्त है।

स्वमी प्रबोधानंद गिरि ने कहा कि यदि श्रीमहंत हरिगिरि में जरा सा भी ईमान है तो वह अखाड़े की आय-व्यय का ब्यौरा सार्वजनिक करे। अखाड़े का उन्होंने हरिगिरि को बेड़ा करने का प्रमुख कारक बताया।

उन्होंने कहाकि यह एक गैंग के रूप में कार्य करते हैं। जिस व्यक्ति को फर्जी संत और कालनेमि बताकर इन्होंने पूर्व में जिसका निष्कासन किया था आज उसी को जगद्गुरु बना रहे हैं, जबकि इन्हें जगद्गुरु बनाने का कोई अधिकार ही नहीं है।

स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने कहाकि इनकी इस्मालमिक जिहादियों से सांटगांठ है और यह उनकी हत्या तक करवा सकते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि संबंधित लोगों की अवैध संपत्ति और गतिविधियों की विशेष जांच एजेंसी से जांच कराई जाए। साथ ही अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की।

स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने कहा कि वह जीवनभर सनातन धर्म, गौसेवा और संतों की सेवा के लिए कार्य करते रहेंगे तथा देशभर में धर्म जागरण के लिए निरंतर अभियान चलाते रहेंगे।

प्रेसवार्ता के दौरान स्वामी सत्यव्रतानंद सरस्व्ती, स्वामी ओमानंद, प्रकाशानंद सरस्वती, वीरेन्द्र स्वरूप, प्रज्ञानंद गिरि, लक्की वर्मा, अमित वर्मा व लक्की राठौर आदि मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

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