पितृमोक्ष अमावस्या पर शांतिकुंज में 18 पारियों में श्राद्ध संस्कार
हरिद्वार, 10 अक्टूबर (हि.स.)। अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और आत्मीय स्मरण के भाव के साथ पितृमोक्ष अमावस्या पर गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में श्राद्ध संस्कार संपन्न हुए। परिसर के चार अलग-अलग स्थानों पर कुल 18 पारियों में आयोजित इन संस्कारों में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, बिहार और गुजरात सहित विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं तथा शांतिकुंज के भाई-बहनों ने भाग लिया।
वहीं वर्चुअल माध्यम से जर्मनी, इटली, अमेरिका, इंग्लैण्ड, लिथुआनिया सहित कई देशों के श्रद्धालुओं ने अपने पितरों के निमित्त विधि-विधान से श्राद्ध संस्कार संपन्न कराए और पूर्वजों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त की। पितृमोक्ष अमावस्या पर उन पितरों के निमित्त भी श्राद्ध करने की परंपरा है, जिनकी तिथि ज्ञात नहीं होती। इस अवसर पर लोगों ने अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए पारिवारिक परंपराओं के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
इस दौरान शांतिकुंज में आचार्यों ने कहा कि भारतीय संस्कृति में श्राद्ध संस्कार पूर्वजों के उपकारों को याद करने और उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर है। अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान का भाव परिवार में संस्कारों की निरंतरता बनाए रखता है। नई पीढ़ी को इस परंपरा से परिचित कराना भी आवश्यक है, ताकि वह अपने सांस्कृतिक मूल्यों और पारिवारिक विरासत को समझ सके।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

