संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने पुणे में शिक्षाविदों के साथ की बैठक

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संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने पुणे में शिक्षाविदों के साथ की बैठक


-संस्कृत के वैश्विक प्रचार-प्रसार पर उत्तराखंड और पुणे विश्वविद्यालय के बीच मंथनदेहरादून, 26 जुलाई (हि.स.)। उत्तराखंड शासन के संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने संस्कृत के वैश्विक प्रचार-प्रसार तथा अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महाराष्ट्र के पुणे स्थित सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय (एसपीपीयू) और अन्य शैक्षणिक संस्थानों का दौरा किया। इस दौरान संस्कृत, पाली और प्राकृत भाषाओं के अध्ययन, शोध, पाठ्यक्रम विकास, तकनीकी सहयोग तथा विद्यार्थियों के हितों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, दीपक कुमार ने एसपीपीयू के कुलपति प्रो. सुरेश गोसावी, प्रति-कुलपति प्रो. पराग कालकर तथा संस्कृत-प्राकृत एवं पाली अध्ययन विभाग के शिक्षकों से मुलाकात की। बैठक में संस्कृत भाषा को देश और विदेश में अधिक व्यापक बनाने, विश्वविद्यालयों में इसके अध्ययन-अध्यापन को सुदृढ़ करने और नई शैक्षणिक पहलों पर विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में महाराष्ट्र के विभिन्न विश्वविद्यालयों में संस्कृत को भाषा और विषय दोनों रूपों में प्रोत्साहित किए जाने के प्रयासों की समीक्षा की गई। एसपीपीयू के संस्कृत एवं प्राकृत विभागाध्यक्ष प्रो. दिवाकर मोहंती, पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. देवनाथ त्रिपाठी तथा कविकुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय, रामटेक (नागपुर) के डीन प्रो. हरेकृष्ण अगस्ती के साथ संस्कृत की वर्तमान स्थिति पर चर्चा हुई।

इस दौरान महाराष्ट्र में संस्कृत को तीसरी भाषा के रूप में शामिल करने तथा प्राक्-शास्त्री स्तर के विद्यार्थियों के हित में आवश्यक सरकारी प्रस्ताव (जीआर) पारित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया गया। मंत्र चिकित्सा और प्रज्ञाचक्षु जैसे विषय भी चर्चा का हिस्सा रहे।

पाली एवं बौद्ध अध्ययन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. महेश देवकर, डॉ. प्रवीण तलत, डॉ. तृप्तिरानी तायडे, डॉ. दीपाली पाटिल, डॉ. प्रणाली वैनगंकर, डॉ. मृगेंद्र प्रताप, डॉ. जयकर तथा सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) की टीम के साथ पाली, प्राकृत और संस्कृत के पारस्परिक संबंध, उनके उद्भव एवं विकास पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में महाराष्ट्र में पाली अध्ययन की वर्तमान स्थिति, पाठ्यक्रम, शोध गतिविधियों तथा अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों की भागीदारी की भी जानकारी साझा की गई। विभाग वर्तमान में 12 शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित कर रहा है, जिनमें लगभग 200 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं और अनेक विदेशी छात्र भी अध्ययन कर रहे हैं।

बैठक में सी-डैक द्वारा पाली विभाग के सहयोग से विकसित की जा रही अनुवाद प्रणाली तथा पाली शब्दकोश परियोजना की प्रगति की भी जानकारी दी गई। बताया गया कि इस परियोजना के अब तक 10 खंड प्रकाशित हो चुके हैं। विभाग के समृद्ध पुस्तकालय और दुर्लभ ग्रंथों के संग्रह की भी सराहना की गई।

बैठक में संस्कृत, पाली और बौद्ध अध्ययन के बीच तुलनात्मक शोध को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों और सी-डैक की टीम के साथ इस विषय पर व्यापक एवं सार्थक चर्चा हुई।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

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