मुर्गी पालन से आत्मनिर्भर बनीं भारती रावत, हर उत्पादन चक्र में 50 से 55 हजार रुपये की आय
हरिद्वार, 21 अक्टूबर (हि.स.)। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के माध्यम से महिलाएं अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं। हरिद्वार जनपद के बहादराबाद विकासखंड के लालढांग क्षेत्र स्थित चमारिया गांव निवासी भारती रावत ने मुर्गी पालन को आजीविका का माध्यम बनाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया है।
ग्रामीण उद्यम त्वरण परियोजना के तहत मिली वित्तीय सहायता और सब्सिडी से उन्होंने वर्ष 2025 में ब्रॉयलर पोल्ट्री फार्म शुरू किया। आज वह प्रत्येक उत्पादन चक्र में लगभग 50 से 55 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं।
35 वर्षीय भारती रावत, पत्नी कमल रावत, ने अपने घर के समीप कृषि भूमि पर पोल्ट्री यूनिट स्थापित की।
व्यवसाय शुरू करने के लिए उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय योजना के अंतर्गत सहकारी बैंक से 1.60 लाख रुपये का ब्याजमुक्त ऋण लिया और पोल्ट्री शेड का निर्माण कराया। इसके अलावा परियोजना के तहत उन्हें 75 हजार रुपये की सब्सिडी मिली। सरकारी योजनाओं से मिले सहयोग ने उनके उद्यम की शुरुआत आसान बनाई।
2,200 चूजों की क्षमता, अब तक पूरे किए सात उत्पादन चक्र
भारती रावत की पोल्ट्री यूनिट में प्रत्येक उत्पादन चक्र में लगभग 2,200 ब्रॉयलर चूजों का पालन किया जाता है। एक चक्र पूरा होने में 40 से 45 दिन का समय लगता है। वह अब तक सात उत्पादन चक्र सफलतापूर्वक पूरे कर चुकी हैं। इस व्यवसाय से होने वाली आय परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मदद कर रही है।
हैचरी से मिल रहा तकनीकी सहयोग
पोल्ट्री व्यवसाय के संचालन में परिवार को हरियाणा के करनाल स्थित कल्याण हैचरी से सहयोग मिलता है। इसके तहत एक दिन के वैक्सीनेटेड चूजों की आपूर्ति, पशु आहार, टीकाकरण, परिवहन, पशु चिकित्सकीय परामर्श और तैयार पक्षियों के विपणन में सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इससे चूजों के पालन से लेकर बिक्री तक की प्रक्रिया में सहयोग मिलता है।
पक्षियों की बिक्री डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से विक्रेताओं और ठेकेदारों की मांग के अनुसार की जाती है। निर्धारित दर और मात्रा के आधार पर पक्षियों का वजन कराया जाता है। विभिन्न निर्धारित खर्चों की कटौती के बाद शेष भुगतान सीधे किसान के बैंक खाते में हस्तांतरित किया जाता है। इससे बाजार तक पहुंच और बिक्री प्रक्रिया में सुविधा मिलती है।
सरकारी योजनाओं से मिला स्वरोजगार को बढ़ावा
भारती रावत की पहल दर्शाती है कि वित्तीय सहायता, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार से जुड़ाव ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने में मददगार हो सकते हैं। मुर्गी पालन के माध्यम से वह परिवार की आय में योगदान देने के साथ अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं।
भारती रावत ने स्वरोजगार के लिए सहायता और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा जिलाधिकारी मयूर दीक्षित का आभार जताया। उन्होंने कहा कि परियोजना के तहत मिली सब्सिडी और दीनदयाल उपाध्याय योजना के अंतर्गत मिले ब्याजमुक्त ऋण से उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने और परिवार की आय बढ़ाने में मदद मिली है।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

