उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम के लिए हर जिले को 'जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट' बनाने का निर्देश

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उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम के लिए हर जिले को 'जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट' बनाने का निर्देश


देहरादून, 05 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ती जनहानि को रोकने के लिए अब प्रत्येक जिले को ‘जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट’ के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस अभय मनोहर सप्रे ने सोमवार को यहां सड़क सुरक्षा की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को दुर्घटनाओं के कारणों का विस्तृत विश्लेषण कर रोकथाम के लिए समयबद्ध कदम उठाने के निर्देश दिए।

पूर्व न्यायाधीश सप्रे ने सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए 4ई—इंजीनियरिंग, एनफोर्समेंट, एजुकेशन और इमरजेंसी केयर—के बीच समन्वय को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि केवल प्रवर्तन कार्रवाई से दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है, बल्कि सड़क सुधार, नियमों के प्रति जागरूकता और दुर्घटना के बाद त्वरित चिकित्सा सुविधा पर भी समान रूप से काम करना होगा। जिला सड़क सुरक्षा समितियों की बैठक हर माह अनिवार्य रूप से आयोजित करने और लिए गए निर्णयों पर हुई कार्रवाई का विवरण मोर्थ पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश भी दिए गए।

मुख्य सचिव आनंद बर्धन समेत संबंधित विभागों के अधिकारियों और जिलाधिकारियों के साथ हुई बैठक में बताया गया कि जनवरी से अगस्त तक राज्य में 1,480 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 884 लोगों की मृत्यु हुई, जबकि 1,626 लोग घायल हुए। देहरादून, ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार और नैनीताल में सबसे अधिक दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इन जिलों में क्रमशः 131, 229, 213 और 104 लोगों की मौत हुई। घायलों की संख्या क्रमशः 322, 338, 279 और 334 रही।

समीक्षा में यह तथ्य भी सामने आया कि शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में जनहानि अधिक है। सप्रे ने प्रत्येक दुर्घटना का गहन विश्लेषण करने को कहा। इसमें दुर्घटना का कारण, मृत्यु के कारण, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय और उन उपायों के क्रियान्वयन की निगरानी शामिल होगी।

बैठक में सरकारी कर्मचारियों और सरकारी संस्थानों में मोटर वाहन कानूनों के पालन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए। ‘नो हेलमेट-नो एंट्री’, बिना ड्राइविंग लाइसेंस और बिना बीमा के प्रवेश पर रोक जैसी व्यवस्थाओं को लागू करने को कहा गया। स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भी सड़क सुरक्षा नियमों के पालन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में सुधार के तहत सभी परिवहन कार्यालयों में ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक की स्थापना जल्द पूरी करने को कहा गया है। इसके माध्यम से लाइसेंस जारी करने से पहले कंप्यूटरीकृत आधार पर चालकों की परीक्षा कराने की व्यवस्था की जाएगी।

चारधाम यात्रा मार्गों पर यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों और चालकों की निगरानी के लिए एएनपीआर कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए। मौजूदा एएनपीआर कैमरों में भी अन्य यातायात उल्लंघनों को शामिल करने को कहा गया है। चारधाम मार्गों पर सीएसआर के तहत ट्रॉमा सेंटर और चालक विश्राम गृह स्थापित करने की संभावनाओं का परीक्षण करने के भी निर्देश दिए गए। वहीं देहरादून और हरिद्वार में निर्माणाधीन चिल्ड्रन ट्रैफिक पार्क में दोपहिया और चारपहिया वाहनों के सिमुलेटर लगाने के लिए वाहन निर्माता कंपनियों से सीएसआर के तहत सहयोग लेने को कहा गया।

सड़क पर गड्ढों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सुधार कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा करने और संबंधित विभाग की जिम्मेदारी तय करने को कहा गया। पर्वतीय मार्गों पर वाहनों को गहरी खाई में गिरने से रोकने के लिए शेष मार्गों पर क्रैश बैरियर लगाने की समय-सीमा तय करने के निर्देश दिए गए। स्थापित होने वाले क्रैश बैरियर आईआरसी मानकों के अनुरूप होने चाहिए। दुर्घटना के बाद घायलों को ‘गोल्डन ऑवर’ में उपचार उपलब्ध कराने के लिए मेडिकल रिस्पॉन्स टाइम कम करने पर भी जोर दिया गया। आवारा पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए राज्य स्तर पर नीति तैयार करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्धन, परिवहन सचिव एवं आयुक्त रविनाथ रमन, सचिव वित्त रणवीर सिंह चौहान, निदेशक यातायात कृष्ण कुमार, अपर सचिव परिवहन रीना जोशी, अपर सचिव लोक निर्माण विभाग विनीत कुमार, अपर सचिव शिक्षा नमामि बंसल, अपर सचिव गृह तृप्ति भट्ट, अपर सचिव शहरी विकास संतोष बडोनी और अपर सचिव वन नूतन लक्ष्मी मौजूद रहे। इसके अलावा अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह, संयुक्त परिवहन आयुक्त राजीव कुमार मेहरा, प्रमुख अभियंता एवं विभागाध्यक्ष लोक निर्माण विभाग राजेश शर्मा, उप परिवहन आयुक्त शैलेश तिवारी एवं सुनील शर्मा, संभागीय परिवहन अधिकारी अनीता चमोला एवं संदीप सैनी,महानिदेशक चिकित्सा डॉ. शिखा जंगपांगी सहित संबंधित विभागों के अन्य अधिकारी उपस्थित थे। सभी जिलाधिकारियों, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों, पुलिस अधीक्षकों और संभागीय और सहायक संभागीय परिवहन अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भाग लिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

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